बिहार में कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डुबकी

कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान करने गए 10 लोगों की हादसों में मौत, दो लापता
पटना : कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बिहार में लाखों श्रद्धालुओं ने मंगलवार को गंगा-गंडक के संगम समेत विभिन्न नदियों और सरोवरों में आस्था की डुबकी लगायी।
हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन को दामोदर के नाम से भी जाना जाता है। यह भगवान विष्णु का ही एक नाम है। कार्तिक पूर्णिमा का दिन काफी पवित्र और शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था। जिसकी खुशी में देवताओं ने हजारों दीप जलाकर दिवाली मनाई थी। जो आज भी देव दिवाली के रूप में मनाई जाती है। साथ ही सिखों के लिए भी ये दिन खास होता है क्योंकि इस दिन गुरु नानक जयंती होती है। कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर राजधानी पटना में देर रात से ही ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह होते ही श्रद्धालु ‘हर-हर गंगे, जय गंगा मैया, हर हर महादेव’ के जयकारे के साथ गंगा में डुबकी लगाने लगे। राजधानी पटना में गंगा तट के काली घाट, कृष्णा घाट, गांधी घाट, पटना कॉलेज घाट समेत विभिन्न घाटों पर मंगलवार तड़के से आस्था की डुबकी लगाने वालों का तांता लगा रहा। स्नान के बाद लोगों ने विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना की और दान किया। मंदिरों में भी अन्य दिनों की अपेक्षा पूजा-अर्चना करने वालों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। कार्तिक पूणिमा के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है। इस दिन जो भी दान किया किया जाता है, उसका पुण्य कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इस दिन अन्न, धन और वस्त्र दान का विशेष महत्व है। गंगा किनारे दानापुर से पटना सिटी तक की सड़कों पर ग्रामीण मेले जैसा नजारा देखने को मिला। पटना से हजारों श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए सोनपुर पहुंचे और वहां स्नान के साथ ही महादेव की पूजा-अर्चना की। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और भगवान हरि एवं शिव की पूजा करने से पूर्वजन्म के साथ इस जन्म के भी सारे पाप नाश हो जाते हैं। साथ ही गंगा या अन्य नदियों में स्नान से सालभर के गंगास्नान और पूर्णिमा स्नान का फल मिलता है। भगवान श्रीहरि ने कार्तिक पूर्णिमा पर ही मत्स्य अवतार लेकर सृष्टि की फिर से रचना की थी। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन सोनपुर में गंगा गंडकी के संगम पर गज और ग्राह का युद्ध हुआ था। गज की करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने ग्राह का संहार कर भक्त की रक्षा की थी। इस दिन घर में दीपक जलाने से पुण्य मिलता है और जीवन में ऊर्जा का संचार भी होता है। लोग व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।

एनडीआरएफ ने बरती चौकसी
गंगा तटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवान संयुक्त रूप से नौकाओं से लगातार गंगा नदी में गश्त लगा रहे थे। कार्तिक पूर्णिमा के दिन एहतियात के तौर पर प्रशासन की ओर से निजी नौकाओं के गंगा नदी में परिचालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। राजधानी पटना में कार्तिक पूर्णिमा को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गये। विभिन्न घाटों पर सादे लिबास में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गयी। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जहां पुलिस जवान चौकस दिखे वहीं सड़कों पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के जवान मुस्तैद थे। हाजीपुर से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला क्षेत्र के समीप गंगा-गंडक संगम पर भी लाखों लोग स्नान के लिए जुटे। लोग संगम में डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना कर रहे थे। करीब डेढ़-दो लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगायी और प्रसिद्ध बाबा हरिहर नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। भागलपुर से मिली सूचना के अनुसार सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा नदी में हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगायी और पहाड़ पर स्थिति बाबा अजगैबी नाथ मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके अलावा कहलगांव, भागलपुर शहर और नाथनगर में भी लोगों ने गंगा नदी में पवित्र स्नान कर पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं की भीड़ के मद्देनजर घाटों पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा की व्यवस्था की गयी थी। उत्तर बिहार में भी लाखों लोगों ने बूढ़ी गंडक, कमला और कोसी नदियों में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पवित्र स्नान किया और मंदिरों में पूजा अर्चना की। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने विभिन्न सरोवरों और तालाबों में स्नान कर पूजा अर्चना की।

हादसों भरा दिन, 10 की मौत, दो लापता

बिहार में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर स्नान करने गए 10 लोगों की अलग-अलग हादसे में मंगलवार को मौत हो गयी तथा दो अन्य लापता बताए जा रहे हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग से मंगलवार को प्राप्त जानकारी के मुताबिक, नवादा एवं नालंदा जिले में तीन-तीन व्यक्तियों, औरंगाबाद पश्चिम चंपारण और सीतामढ़ी में एक-एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गयी। नवादा जिले के कौआकोल थाना क्षेत्र में सेखोदेवरा सूर्य मंदिर के तालाब में डूबने से दो युवतियों सहित तीन लोगों की मौत हो गयी। कौआकोल थाना अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि मृतकों के नाम अनुराधा कुमारी (18), शिल्पी कुमारी (18) और अविनाश कुमार (40) हैं। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा के अवसर पर तालाब में नहा रही दोनों लड़कियां जब डूबने लगीं तो वहां मौजूद जमुई जिले के अलीगंज प्रखंड में शिक्षक पद पर कार्यरत अविनाश ने उन्हें बचाने की कोशिश की। लेकिन अविनाश की भी डूबने से मौत हो गई। तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला सदर अस्पताल लाया गया है। वहीं, कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर नालंदा जिला के पावापुरी पुलिस चौकी के घोसरवा गांव के समीप से गुजर रही सकरी नदी में स्नान करने गयी तीन युवतियों की डूबने से मौत हो गयी। पावापुरी पुलिस चौकी प्रभारी प्रभा कुमारी ने बताया कि मृतकों के नाम अंशु कुमारी (17), सोनम कुमारी (15) और प्रीति कुमारी (17) हैं। उन्होंने बताया कि तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला सदर अस्पताल लाया गया है। जबकि सीतामढ़ी जिला के बैरगनिया ढेंग के समीप से गुजर रही बागमती नदी में नहा रहे एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गयी। दो अन्य व्यक्ति लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश एसडीआरएफ द्वारा जारी है। औरंगाबाद और पश्चिम चंपारण में भी एक-एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गयी। पटना और सारण जिला के बीच पानापुर के पास डूबने से एक व्यक्ति की मौत की सूचना है।

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