बिहार के सीएम नीतीश ने बीजेपी से हिसाब चुकता किया

पटनाः मोदी सरकार 2.0 में एक मंत्री का पद ठुकराने के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भाजपा से राज्य मंत्री परिषद विस्तार कर इसका बदला लिया। दरअसल, बिहार में जदयू ने भाजपा को एक मंत्री पद का ऑफर दिया था जिससे बीजेपी ने इनकार कर दिया था। माना जा रहा है कि केंद्र के प्रस्ताव से नाराज नीतीश ने मंत्रिपरिषद विस्तार में एक के बदले एक प्रस्ताव के जरिए हिसाब चुकता किया। जदयू एनडीए दलों के विपरीत मोदी मंत्रिपरिषद में ‘समानुपातिक प्रतिनिधित्‍व’ चाहती है। इसके तहत वह 2 से 3 मंत्री पद चाहती है लेकिन इससे बीजेपी के लिए संकट पैदा हो जाएगा क्‍योंकि महराष्‍ट्र में उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना के जेडीयू से ज्‍यादा सांसद हैं। इसलिए जदयू ने पहले ही मना कर दिया था कि केंद्र में वह शामिल नहीं होगा।
डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने इस बात की पुष्टि की है कि उनकी पार्टी को एक मंत्री बनाए जाने का ऑफर दिया गया था लेकिन उन्‍होंने इसे फिलहाल मना कर दिया है और ‘भविष्‍य में इसे भरा’ जाएगा। यही नहीं एनडीए के एक और सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी को भी इस विस्‍तार में शामिल नहीं किया गया है। राज्‍य में अब 33 मंत्री हैं जबकि 243 सदस्‍यीय विधानसभा में मंत्रियों की अधिकतम संख्‍या 36 है। इनमें से अभी एक मंत्री बीजेपी, एक एलजेपी और एक जेडीयू का बनाया जा सकता है।

दोनों पार्टियों में मतभेद
जदयू और बीजेपी के फिर से अलग होने की संभावना नहीं है और इसकी वजह विधानसभा चुनाव है। राज्‍य में अगले साल चुनाव होने हैं। वर्ष 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में जदयू और बीजेपी को आरजेडी के हाथों कई सीटें गंवानी पड़ी थीं। आरजेडी पिछले चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी। इसके अलावा पांच राज्‍यसभा सांसद रिटायर होने जा रहे हैं, इसमें तीन जेडीयू और दो बीजेपी से हैं। इन सीटों के लिए अगले साल चुनाव होना है।

जदयू का इतिहास
बता दें कि जदयू करीब 17 साल तक एनडीए में शामिल रहने के बाद वर्ष 2013 में बीजेपी के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नरेंद्र मोदी को पीएम पद का प्रत्‍याशी बनाए जाने के बाद उससे अलग हो गई थी। वर्ष 2017 में लालू यादव की आरजेडी और कांग्रेस से मतभेद के बाद नीतीश कुमार ने फिर से बीजेपी पार्टी के साथ आ गई थी।

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