बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में हो बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार : सुशील मोदी

पटना : बिहार के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को केंद्र सरकार से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की।
सुशील कुमार मोदी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक और पत्र लिखकर बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार करने, सभी ग्राम पंचायतों को बैंक शाखाओं से जोड़ने, सभी बैंक शाखाओं एवं खासकर गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में एटीएम की सुविधा उपलब्ध कराने, बैंकिंग करॉस्पॉंडेंट (बीसी) केंद्रों पर उपभोक्ताओं को पासबुक प्रिटिंग की सुविधा देने, बीसी की निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नियामक संस्था बनाने और अनुसूचित जाति-जनजाति एवं कमजोर वर्गों के लिए बैंकों के जरिए संचालित सरकार की योजनाओं के प्रखंड तथा पंचायत स्तर की उपलब्धियों के आंकड़े उपलब्ध कराने की मांग की है। उपमुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रति लाख आबादी पर 12.52 की जगह बिहार में मात्र 7.07 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 4.01 बैंक की शाखाएं हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह एटीएम की उपलब्धता भी प्रति लाख आबादी पर राष्ट्रीय औसत 18.31 की तुलना में बिहार में मात्र 7.43 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में महज 1.42 है। गौरतलब है कि बिहार की 88.71 प्रतिशत आबादी 8400 ग्राम पंचायतों में रहती है। राज्य की 5000 ग्राम पंचायतों में स्थायी बैंक शाखाएं नहीं है जबकि 15 प्रतिशत से अधिक पंचायतों में तो बैंकिंग करॉस्पॉंडेट की सुविधा भी नहीं है। मोदी ने पत्र में कहा है कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) एटीएम की सुविधा उपलब्ध नहीं कराता है। बिहार के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में अधिक से अधिक एटीएम सुविधा की जरूरत है। वहीं, दूसरी ओर त्योहार के मौसम में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के एटीएम में नकदी नहीं रहने से लोगों को काफी असुविधा होती है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग करॉस्पॉंडेंट के जरिए उपलब्ध कराई जा रही सेवा बहुत प्रभावकारी नहीं है। वहां पासबुक प्रिंटिंग की कोई व्यवस्था नहीं रहने से उपभोक्ता अपने लेन-देन का कोई रिकार्ड नहीं रख पाते हैं। बीसी द्वारा थर्मल पेपर पर दिया जाने वाला प्रिंटआउट टिकाऊ नहीं होता है, ऐसे में किसी विवाद की स्थिति में ग्रामीण उपभोक्ताओं के पास कोई प्रमाण नहीं होता है। बीसी मॉडल के कार्यों की निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नियामक संस्था बनाने की जरूरत है। मोदी ने लिखा है कि राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति एवं कमजोर वर्गों के लिए बैंकों के जरिए संचालित योजनाओं का कोई आंकड़ा बैंक तैयार नहीं करते हैं। इसी तरह राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में राज्य और जिला स्तर के डाटा तो उपलब्ध कराते हैं लेकिन प्रखंड एवं पंचायत स्तर के आंकड़ों के अभाव में जमीनी स्तर पर उपलब्धियों की प्रभावकारी समीक्षा संभव नहीं हो पाती है।

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