बिहार की प्रतिभाओं का कोई जवाब नहीं : राज्यपाल फागू चौहान

Fagu Chauhan appointed new Governor of Bihar

छपरा : बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति फागू चौहान ने मंगलवार को कहा कि प्राचीन काल से ही बिहार भारतीय विधाओं एवं विश्वविद्यालय का केंद्र रहा है और बिहार की प्रतिभाओं का कोई जवाब नहीं है।
फागू चौहान ने यहां जयप्रकाश विश्वविद्यालय में आयोजित पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में धर्म, नीति, विधा और साधना के सर्वोच्च संस्थान रहे हैं और भारत समेत संपूर्ण विश्व में राज्य के युवा अगली कतार में खड़े हैं। सारण प्रमंडल आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक रूप से गतिशील एवं तरंगित रहा है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर स्थापित है और उन्होंने स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़े आंदोलन को लोकतंत्र की रक्षा के लिए ‘संपूर्ण क्रांति’ के नारा के साथ प्रारंभ किया था। राज्यपाल ने डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों का आह्वान किया और कहा कि इस उपाधि को ग्रहण करने के बाद आपकी जिम्मेदारी बनती है कि प्राप्त शिक्षा से मात्र आप अपना निजी ही नहीं बल्कि राष्ट्र के विकास में योगदान देने का प्रयास करें। उन्होंने ‘मातृ देवो भव:, पितृ देवो भव: आचार्य देवो भव: के साथ ही कुल देवो भव:, समाज देवो भव: और राष्ट्र देवो भव:’ को आत्मसात करने का भी आह्वान उपाधि पाने वाले छात्रों से की। समारोह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय उच्च तिब्बती संस्थान, सारनाथ, वाराणसी के कुलपति पद्मश्री प्रो. गेशे नवांग सामतेनजी ने कहा कि बिहार की धरती प्राचीन काल से ही ज्ञान की धरती रही है। उन्होंने कहा कि प्राचीन नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय को आज भी पूरा विश्व नमन करता है। सामतेनजी ने कहा कि पूरे विश्व में विश्वविद्यालय की परिकल्पना प्राचीन बिहार की देन है। पश्चिमी सभ्यता में नालंदा की तर्ज पर 10वीं शताब्दी में बुल्गारिया में विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी थी। उन्होंने कहा कि आज तिब्बत में भी नालंदा का अस्तित्व है और लगभग 500 से ज्यादा ग्रंथों का अनुवाद तिब्बती भाषा में किया गया है। कुलपति ने कहा कि वर्ष 1930 में राहुल सांकृत्यायन ने जब तिब्बत की यात्रा की थी तो उनके द्वारा उक्त सभी अभिलेखों को वहां से लाने का काम किया गया था जो आज भी पटना के म्यूजियम में रखी हुई हैं। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों का आह्वान किया कि चूंकि प्राचीन काल से ही भारत और बिहार पूरे विश्व को प्रकाशित करने का कार्य करता रहा है इसलिए आप भी अपने ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म से पूरे विश्व को प्रकाशित करें। उन्होंने छात्रों से मन के अंदर के आंतरिक शांति से आतंकवाद की समाप्ति के संकल्प लेने की अपील की।

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