बड़ी खबरः ऑक्सिजन की ‘मॉक ड्रिल’, एक झटके में 22 मरीजों की मौत

लखनऊ: मंगलवार सुबह से ही आगरा के पारस अस्पताल की चर्चा चारों ओर हो रही है। दरअसल, यहां कोरोना के मरीजों की ऑक्सीजन बंद कर देखा गया कि कौन मर रहा है और कौन नहीं। पारस अस्पताल के मालिक डॉक्टर अरिंजय सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वह कुछ ऐसा कहते सुनाई दे रहे हैं। मामला उस वक्‍त का है जब अप्रैल में ऑक्सीजन की भारी किल्लत थी।
वायरल वीडियो में डॉक्टर अरिंजय सिंह बता रहे हैं कि उनके अस्पताल में उस दिन कोरोना के 96 मरीज भर्ती थे। ऑक्सीजन की किल्लत की वजह से उन्होंने तीमारदारों से कहा कि वे अपने मरीजों को कहीं और ले जा सकते हैं, लेकिन चूंकि कहीं भी ऑक्सीजन नहीं थी इसलिए कोई अपने मरीज को शिफ्ट करने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद डॉ अरिंजय यह बताते हैं कि मरीज ज्‍यादा थे और ऑक्सीजन कम तो उन्होंने ऑक्सीजन का मैनेजमेंट कैसे किया। इस पर वायरल वीडियो में उनकी बातचीत का टेक्स्ट इस तरह है:

डॉ अरिंजय: “जो भी पेंडुलम बने रहे कि नहीं जाएंगे,नहीं जाएंगे। मैंने कहा कोई नहीं जा रहा है। दिमाग मत लगाओ छोड़ो। अब वो छांटो जिनकी (ऑक्सीजन) बंद हो सकती है।”

डॉक्टर के सामने बैठा शख्स: “जो बिल्कुल ही डेड लाइन पर हैं। “

डॉ अरिंजय : “एक ट्रायल मार दो। मॉक ड्रिल कर के देख लो कि कौन सा मरेगा, कौन सा नहीं मरेगा ?’

डॉ के सामने बैठा शख्स : “सही बात है, सही बात है।”

डॉ अरिंजय : “मॉक ड्रिल करी। सुबह सात बजे मॉक ड्रिल हुई। किसी को पता नहीं है कि मॉक ड्रिल कराई। सुनकर के सबकी, छंट गए 22 मरीज। नीले पड़ने लगे।”

डॉ के सामने बैठा शख्स : “22 मरीज छंट गए भाई साहब ?”

डॉ अरिंजय:”22 मरीज छंट गए कि ये मरेंगे।”

डॉ के सामने बैठा शख्स :”ओह भाई साहब, कितनी देर के लिये मॉक ड्रिल करी ?”

डॉ अरिंजय :”पांच मिनट के लिए। “

डॉ के सामने बैठा शख्स :”पांच मिनट में 22 मरीज ?मॉक ड्रिल हुए,हुए।”

डॉ अरिंजय : “नीले पड़ने लगे, 74 बचे, इन्हें टाइम मिल जाएगा।” 

डॉ के सामने बैठ शख्स : ” सही बात है।”

डॉ अरिंजय : “फिर 74 से कहा कि अपना सिलेंडर लाओ।”

 

 

वीडियो वायरल होने के बाद जब मीडिया ने पारस अस्पताल के मालिक डॉ अरिंजय जैन से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि किसी मरीज की ऑक्सीजन बंद नहीं की गई बल्कि ऑक्सीजन की किल्लत की वजह से उसका बेहतर मैनेजमेंट करने के लिए ऑक्सीजन के फ्लो मीटर से चेक किया गया कि किस मरीज को कितनी ऑक्सीजन की जरूरत है। इसके लिए मरीजों की अलग-अलग कैटेगरी बनाई गईं। आगरा के डीएम प्रभु नारायण सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए उसकी जांच कराई जाएगी।

इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर बात डॉ अरिंजय की बातचीत का वो हिस्सा है जिसमें वो कोरोना के मरीजों के साथ 5 मिनट के लिए मॉकड्रिल करने की बात कहते हैं और ये भी कहते हैं कि 22 मरीज छंट गए। वे मरीज नीले पड़ने लगे। पता चल गया कि ये मर जाएंगे। मरीज को लगी ऑक्सीजन का प्रेशर उसके फ्लो मीटर से पता चलता रहता है। उसके लिए कौन-सी मॉक ड्रिल की गई ?और क्यों की गई? यह उन्होंने नहीं बताया। उन्होंने ये भी नहीं बताया कि उस मॉकड्रिल में ऐसा क्या किया गया जिससे 22 मरीज नीले पड़ने लगे?

 

 

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