बच्चों के आंख कमजोर होने के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

कोलकाता : हमारे शरीर के सबसे कोमल लेकिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंगों में से एक है आंख। आप नीचे बताए हुए लक्षणों पर जरूर ध्यान दें। अगर आपको लगता है कि ये लक्षण बच्चे में नजर आ रहे हैं तो आपको तत्काल आंखों के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए…

बार-बार आंखों को मलना
अगर आपका बच्चा अक्सर अपनी आंखों को मलता रहता है इसके अलावा किसी भी वस्तु को देखने के लिए वो अपनी आंखों पर जोर डालता है या आंखों को आगे करके देखने का प्रयास करता है तो समझ जाएं कि कहीं न कहीं ये आंखों की कमजोरी की निशानी है।
एक आंख को खोलकर और दूसरी आंख को बंद करके देखना
अगर आपका बच्चा मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर या अन्य कुछ भी जिनसे तेज रोशनी निकलती है को देखने के दौरान एक आंख बंद कर लेता है तो इसकी अनदेखी न करें।
सिर में अक्सर दर्द होना
अगर आपका बच्चा पढ़ाई करने के कुछ देर बाद कह रहा है कि उसके सिर में तेज दर्द हो रहा है या फिर टीवी वगैरह देखने के बाद सिर दर्द की शिकायत आपसे करता है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए।
आंख में दर्द
बच्चे की आंखों में दर्द हो रहा हो या अगर वो ये कह रहा है कि उसकी आंखों में कुछ चुभन जैसी महसूस हो रही है तो इसका मतलब की आंखें कमजोर हो रही है। इसके अलावा आंखों से पानी आने की समस्या को भी नजरंदाज नहीं करें।
तेज रोशनी को बर्दाश्त नहीं कर पाना
हालांकि अचानक तेज रोशनी नजर आने पर सबकी आंखें असहज हो जाती हैं लेकिन अगर आपका बच्चा तेज रोशनी में आने पर बार-बार अपनी पलकें झपकाने लगता है या उसको कुछ धुंधलापन जैसा नजर आने लगे तो इसका मतलब है कि उसकी आंखों कुछ कमजोर हो रही हैं।
दूर की चीजें स्पष्ट नजर नहीं आ रही होंं तो
अगर आपका बच्चा ये कहे कि उसको दूर की चीजें साफ-साफ नजर नहीं आ रही है या आपको ही महसूस हो कि बच्चा दूर की चीजों को देख नहीं पा रहा है और नजदीक जाकर देखते हैं तो इस संकेत की अनदेखी न करें।
आई बॉल की गति में बदलाव
अगर आपके बच्चे की आई बॉल की गति में कुछ फर्क नजर आ रहा है तो उसके बाद भी आपको अपने बच्चे को डॉक्टर से दिखला लेना चाहिए।
आंखों का तिरछापन
अगर आप ये महसूस करें कि आपके बच्चे की आंखें कुछ तिरछी नजर आ रही हैं तो इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
आंखों के सामने अंधेरा छा जाना
किसी काम को कुछ देर करने के बाद अगर आपका बच्चा अपनी आंखों को बंद कर लेता है तो आप उसकी इस गतिविधि को जरूर नोटिस करें। अगर बच्चा आपसे यह कहे कि कभी-कभार उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है तो यह भी कमजोरी के प्रमुख लक्षणों में से एक है।
आंखें लाल हो जाना
हालांकि आंखों के लाल होने के कई और कारण भी हो सकते हैं जैसे कि भरपूर नींद की कमी, आंखों में धूल का प्रवेश कर जाना इत्यादि। लेकिन अगर अक्सर आपके बच्चे की आंखें लाल हो जाती हैं और वह लगातार अपनी आंखों को मलता रहता है तो उसको आंखों के डॉक्टर के पास चेकअप के लिए ले जाएं।
बच्चों की आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय
आपके बच्चे भी मोबाइल, कंप्यूटर, टेबलेट या टीवी का इस्तेमाल करते ही होंगे तो ऐसे में ये बहुत जरूरी है कि आंखों की सही देखभाल के लिए आप उनको प्रेरित करें और कुछ बेहद सरल उपायों का जरूर पालन करवाएं।
आंखों की मालिश
जी हां, आंखों की भी मालिश होती है लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि आंख बेहद नाजुक अंग होते हैं तो इनके मालिश करने का तरीका भी कुछ अलग हटकर होता है। अपनी अंगुलियों से आंखों की पलकें और भौंह के बीच में आहिस्ते-आहिस्ते 10-20 सेकेंड तक मालिश करें। इसके बाद अपने हाथों की दोनों हथेलियों को आपस में कुछ देर तक रगड़ते रहें। कुछ देर में आपको एहसास होगा कि आपकी दोनों हथेलियां गर्म हो चुकी है फिर इसके बाद अपनी हथेलियों को आंख बंद करके पलकों पर रख दें। इससे आंखों का ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है और आंखों को भी राहत मिलती है।
आंखों की सिकाई
ठंडे पानी से आंखों की सिकाई कर सकते हैं। गुलाब जल या खीरे के टुकड़े को आंखों पर रखने से भी आराम मिलता है।
आंखों के लिए एक्सरसाइज
एक पेन या पेंसिल की मदद से आप भली भांति अपने आंखों का एक्सरसाइज कर सकते हैं। पेन या पेंसिल को अपने बच्चे को कहें कि वह इसे एक हाथ की दूरी पर आंखों के सामने पकड़ कर रख ले। इसके बाद धीरे धीरे करके उस पेंसिल या पेन को आंखों के नजदीक लाएं। बच्चे का ध्यान पेंसिल या पेन पर ही केंद्रित रहे। एक बार नजदीक लाना है तो उसके बाद फिर इसको दूर ले जाना है। इस प्रक्रिया को 10-12 बार दोहराना है। आपका बच्चा जिस कमरे में बैठकर स्टडी करता हो वहां उचित रोशनी का प्रबंध होना चाहिए। तेज रोशनी नहीं होना चाहिए। बच्चा जहां बैठता है, उसके पीछे से रोशनी आनी चाहिए न कि सामने से।
पौष्टिक खाना खिलाएं
आंखों की रोशनी के लिए विटामिन ए बहुत आवश्यक होता है। विटामिन ए से परिपूर्ण आहार जैसे कि गाजर वगैरह सलाद या जूस के रूप में आप अपने बच्चे को दे सकते हैं।
साल में एक बार अपने बच्चे की आंखों का चेकअप जरूर करवाएं
बिना किसी डॉक्टरी सलाह के भूल कर भी आखों में कोई दवा या ड्रॉप न दें। एक और जरूरी बात कि आई ड्रॉप के खुलने के बाद एक महीने तक ही उसका इस्तेमाल करें। पुराने आई ड्रॉप का प्रयोग न करें। आंखों में काजल, सूरमा या शहद इत्यादि का प्रयोग न करें।

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