परंपरागत कारीगरों ने बनाई दुनिया में भारत की पहचान : मुख्तार अब्बास नकवी

लखनऊ : केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने शनिवार को कहा कि ‘हुनर हाट’ के आयोजन से परम्परागत ढंग से काम करने वाले कारीगरों को बाजार मिलता है और यह पहल विरासत को संजोने वाले कारीगरों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के अनुसार की गयी है।
मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य हस्तशिल्प और दस्तकारी उद्योगों को बढ़ावा देकर दुनिया के स्तर पर उनका बाजार बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी का सपना है कि भारत में विरासत को संजोने वाले स्थानीय कारीगरों /दस्तकारों को वैश्विक बाजार के स्तर पर लाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से आज परम्परागत दस्तकार बेहतर स्थिति में है और भारत के उत्पादों की पहचान दुनिया में बनी है। इन्ही दस्तकारों की बदौलत देश के कुल निर्यात में भी इजाफा हुआ है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से लखनऊ में ‘हुनर हाट’ का आयोजन किया जा रहा है। नकवी ‘हुनर हाट’ के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। हुनर हाट में कारीगर अपने उत्पादों की बिक्री के साथ साथ वहीं उन्हें तैयार भी कर सकते हैं। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परम्परागत उद्योगों के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाए निहित है और अगर इसे शासन का सहयोग मिले तो निर्यात में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 में जब देश का कुल निर्यात आठ प्रतिशत था, उतर प्रदेश का निर्यात 28 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 24 जनवरी 2018 को प्रदेश सरकार ने ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना शुरू की थी। दो वर्षों के दौरान ही इस योजना के तहत परम्परागत कारीगरों ने महत्वपूर्ण कार्य किया और आज इसके पास एक बड़ा बाजार उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उतर प्रदेश में परम्परागत उद्योगों की समृद्ध विरासत रही है किंतु शासन की उपेक्षा से यह क्षेत्र बेहाल था। प्रदेश सरकार ने न केवल परम्परागत उद्योगों को बढ़ावा दिया बल्कि इसको सब्सिडी, मार्केटिंग और मैपिंग का भी सहयोग प्रदान किया। इसी से उतर प्रदेश में आज परम्परागत उद्योग तेजी से फल फूल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार माटी कला बोर्ड को प्रोत्साहित कर पर्यावरण संतुलन के लिए कार्य कर रही है। अप्रैल से जून तक कुम्हारों को गांव के तालाब से मुफ्त मिट्टी लेने की अनुमति होती है। इससे एक ओर तालाब गहरे होते हैं, जिससे जल संचयन को प्रोत्साहन मिलता है, वहीं कुम्हारों को भी मुफ्त में मिट्टी मिल जाती है। सरकार कुम्हारों को सौर और बिजली चालित चाक भी रियायती दर पर मुहैया कराती है। इससे प्लास्टिक मुक्त उतर प्रदेश बनाने में सफलता मिली है। गौरतलब है कि पिछले तीन वर्षों में पूरे देश के विभिन्न शहरों में अब तक इस प्रकार के 16 हुनर हाट लगाये जा चुके हैं। शनिवार को ही लखनऊ और हैदराबाद में एक साथ दो हुनर हाटों का उद्घाटन हो रहा है। 21 जनवरी तक चलने वाले इस लखनऊ हुनर हाट में विभिन्न राज्यों से आये 131 कारीगर हिस्सा ले रहे हैं।

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