पत्रकार जे डे हत्याकांड: छोटा राजन दोषी करार

मुंबईः मकोका की विशेष अदालत ने पत्रकार जे डे हत्याकांड में अपना फैसला सुनाते हुए छोटा राजन को दोषी करार दे दिया है। जबकि पत्रकार जिगना वोरा और पाल्सन जोसेफ को बरी कर दिया गया है। गौरातलब है कि 2011 में मुंबई के पवई में एक अंग्रेजी अखबार में वरिष्ठ पत्रकार ज्योति डे की अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के शूटरों ने हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था जिनमे से 9 लोगों को दोषी मानते हुए अदालत ने 2 लोगों को बरी कर दिया गया है।
पहली बार छोटा राजन अपराधी सा‌‌बित
मामले में दायर चार्जशीट में पुलिस ने 34 लोगों की गवाही दर्ज की थी। पुलिस, अदालत में जिगना वोरा को अपराधी साबित नहीं कर पाई। इंडोनेशिया से भारत लाये जाने के बाद पहली बार छोटा राजन किसी मामले में अपराधी साबित हुआ है।
क्या था मामला?
जून 2011 में मुंबई के मशहूर पवई इलाके में वरिष्ठ पत्रकार ज्योति डे को पांच गोलिया मारकर उनकी हत्या कर दी गई। हत्या के वक्त ज्योति डे अपनी मोटरसाईकिल पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। शूटर उनका पीछा काफी दूर से कर रहे थे। पास आने पर शूटरों ने पीछे से उन पर 5 गोलियां दाग दीं। मौके पर जुटी भीड़ उन्हें पास ही के हीरानंदानी अस्पताल ले गई। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मुंबई पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाते हुए ज्योति डे के हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया।
पहले से शक था छोटा राजन पर
हमले के बाद खुद छोटा राजन ने मुम्बई के कुछ पत्रकारों को फोन किया और हत्या की जिम्मेदारी ली। राजन का कहना था कि उसने ज्योति डे को मारकर गलती की है लेकिन उसके कान भरे गए थे। इस पूरे मामले में छोटा राजन, शूटर सतीश थंगप्पन, पत्रकार जिगना वोरा समेत कुल 13 आरोपी थे, जिनमें एक आरोपी विनोद असरानी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई है।
जे डे को क्यों मारा?
सीबीआई ने मुंबई की मकोका कोर्ट में दाखिल 300 पेज की चार्जशीट में कहा कि जेडे की एक किताब छोटा राजन समेत 20 गैंगस्टर्स पर आधारित थी, जिसका टाइटल चिंदी- रंक से राजा था और दूसरी किताब दाऊद इब्राहिम पर थी, जिसमें बताया गया था कि कैसे एक छोटा-सा स्मगलर बिना एक भी गोली चलाए इंटरनेशनल डॉन बन जाता है। सीबीआई का मानना है कि छोटा राजन को संदेह था कि उसके प्रतिद्वंद्वी को अच्छी तरह से चित्रित किया जा रहा है। सीबीआई के मुताबिक राजन के खिलाफ लिखे गए डे के कुछ आर्टिकल्स पर भी उसे नाराजगी थी। इसी से राजन को लगने लगा डे दाऊद गिरोह से मिलकर उसकी हत्या करवाना चाहते हैं।

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