पंचतत्व में विलीन हुए हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक खगेंद्र ठाकुर

नीतीश कुमार ने जतायी शोक संवेदना
पटना : हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वयोवृद्ध नेता खगेंद्र ठाकुर का मंगलवार को यहां बांसघाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
मुखाग्नि उनके इकलौते बेटे भास्कर ठाकुर ने दी। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए बांसघाट पर चर्चित कवि अरुण कमल, कथाकार प्रेम कुमार मणि और पूर्व विधायक रामनरेश पांडेय समेत कई साहित्यकार-पत्रकार मौजूद थे। इससे पूर्व सुबह 10 बजे उनकी शवयात्रा राजीव नगर की जनशक्ति कॉलोनी स्थित उनके आवास से निकाली गयी, जो साढ़े दस बजे अदालतगंज स्थित जनशक्ति कार्यालय पहुंची। शवयात्रा में सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार, विधान पार्षद केदारनाथ पांडेय और साहित्यकार आलोक धन्वा समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। लाल झंडे में लिपटे पार्थिव शरीर पर लोगों ने पु्ष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उल्लेखनीय है कि साहित्यकार और भाकपा नेता खगेंद्र ठाकुर का सोमवार को पटना के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था। वह 82 वर्ष के थे। प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव रहे ठाकुर कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उन्हें इलाज के लिए एम्स, पटना में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार अपराह्न उन्होंने अंतिम सांस ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खगेंद्र ठाकुर के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। नीतीश कुमार ने मंगलवार को यहां अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. ठाकुर साहित्य के शिखर पुरुष थे। वे चिंतक, आलोचक के साथ-साथ कवि भी थे। उनका दुनिया से जाना साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। राजनीतिक शख्सियत के रूप में भी ठाकुर वामपंथी विचारों के नायकों में से एक रहे हैं।

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