नीतीश कुमार के बगैर चुनाव लड़ने पर तेजस्वी यादव को आटे-दाल के भाव का चलेगा पता : जदयू

पटना : बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) ने मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के खिलाफ बयानबाजी को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव पर हमला बोलते हुए बुधवार को कहा कि नीतीश कुमार के बगैर इस बार का विधानसभा चुनाव लड़ने पर तेजस्वी यादव को आटे-दाल के भाव का पता चल जाएगा।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने यहां कहा कि जिस समय विधानसभा में बतौर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को दिखना चाहिए, उस समय वह कहीं अन्यत्र होते हैं तो फिर केवल नीतीश निंदा से उन्हें चर्चा में रहने का भले ही अवसर प्राप्त हो जाए लेकिन लोकतंत्र में जब कोई राजनेता जिम्मेदारी और जन अपेक्षाओं के अनुरूप भागीदारी के लिए तैयार नहीं होता है तो उसे जनता के कोप का शिकार होना पड़ता है। राजीव रंजन ने कहा कि शायद यही वजह है कि 15 वर्षों तक बिहार की सत्ता पर काबिज रहने के बावजूद बिहार ने जब एक बार राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके कुनबे को नकार दिया तो उन्हें मौका तभी मिल पाया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरपरस्ती में वर्ष 2015 का चुनाव तेजस्वी यादव की पार्टी ने लड़ी। उन्होंने कहा कि अब जब नीतीश के बगैर तेजस्वी यादव चुनाव लड़ने जाएंगे तो उन्हें आटे-दाल के भाव का पता चलेगा। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि तेजस्वी यादव को यह पता भी चला जब वर्ष 2019 में राजद और उनके सहयोगी दलों की तमाम कोशिशों के बावजूद बिहार में जदयू के अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने जहां 40 में 39 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर ली। वहीं, राजद का सूपड़ा साफ हो गया। उनसे बेहतर कम से कम एक ही सीट सही, कांग्रेस को कम से कम खाता खोलने का अवसर मिला लेकिन यह सबक काफी नहीं था। जनता को नहीं समझ पाने का नुकसान हर पार्टी को भुगतना पड़ता है और राजद इसका अपवाद नहीं है। राजीव रंजन ने तेजस्वी के खिलाफ हमला बोला और कहा कि यदि बिहार में सियासत करनी है तो तेजस्वी को विकास की बात करनी होगी। केवल जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यक्रमों, राज्य सरकार की उपलब्धियों, पार्टी की विचारधारा, इनकी आलोचनाओं से बिहार की जनता के दिल में जगह बना पाना उनके लिए आसान नहीं होगा। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि हर सुबह तेजस्वी यादव की शुरुआत टि्वटर पर नीतीश कुमार के लिए कुछ अनाप-शनाप बयान देने से होती है। ऐसा करने से नेता प्रतिपक्ष की उनकी जो जिम्मेदारी है, वह पूरी नहीं हो जाती है। न वह बाढ़ में दिखते हैं न सुखाड़ के समय जनता के बीच में जा पाते हैं। जिस समय उनके पार्टी के संगठन के कार्यक्रम होते हैं उस समय उनका अता-पता नहीं होता है।
राजीव रंजन ने कहा कि जनता के बीच नहीं जाकर केवल विषवमन करके एक सकारात्मक विपक्ष की भूमिका में राजद अब कहीं दिखती भी नहीं है। इतनी बात तय है कि कुनबा परस्ती, भ्रष्टाचार एवं मुद्दों को लेकर नासमझी से सत्ता की राह बिहार में आसान नहीं है। इसीलिए, यदि तेजस्वी यादव जनता के दिलों में जगह बनाने के बजाय लोगों को गुमराह करने की प्रवृत्ति से नहीं बचें तो फिर उनकी पार्टी तो अस्तित्व संकट से जूझ रही है स्वयं उनके लिए भी कम उम्र होने के बावजूद जन भावनाओं को नहीं समझ पाना एक बड़ी मुश्किल बनती जा रही है। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि राजद का जनता से तो रिश्ता टूटा ही है अब कार्यकर्ता और नेताओं के बीच में संवाद भी घटता जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजद के बड़े नेता असहज महसूस कर रहे हैं और कहीं न कहीं यह उनकी पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं है।

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