निर्मोही अखाड़ा ने सेवादार के रूप में कब्जे का दावा किया

अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय में अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की शुक्रवार को हुई ग्यारहवें दिन की सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि भगवान राम की मूर्ति की स्थापना राम जन्मभूमि में हुई थी और वह सेवादार के रूप में जमीन पर कब्जे का दावा कर रहा है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर के संविधान पीठ के समक्ष अखाड़ा की ओर से सुशील कुमार जैन ने दलील दी कि मैं वक्फ संपत्ति का दावा सेवादार के तौर पर कर रहा हूं। वक्फ शब्द का अर्थ ईश्वर को दान है और उसका संबंध केवल मुसलमानों से ही नहीं है। इस लिहाज से मंदिर पर निर्मोही अखाड़ा का अधिकार है। मालूम हो कि गुरुवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता गोपाल सिंह विशारद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा था कि मुवक्किल उपासक हैं और उन्हें विवादित स्थल पर उपासना का अधिकार है। यह अधिकार उनसे कोई नहीं छीन सकता। कुमार ने रामलला विराजमान के वकील सी एस वैद्यनाथन की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा था कि विवादित जमीन खुद में दैवीय स्थल है और भगवान राम का उपासक होने के नाते उनके मुवक्किल को वहां पूजा करने का अधिकार है।

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