दिन में सेक्स के बारे कितनी बार सोचती हैं महिलाएं ?

कोलकाताः कहते हैं पुरुष दिन में लगभग 34 बार सेक्स के बारे में सोचते हैं।  इससे संबंधित महिलाओं का आंकड़ा क्या है? आमतौर पर महिलाओं के बारे में कहा जाता है कि वे सेक्स की अपनी इच्छा के बारे में मुखर होकर नहीं सोचतीं और नहीं बोलतीं। फिर भी आपके अंदाजे के मुताबिक महिलाएं सेक्स के बारे में दिन में कितने दफा सोचती होंगी? एक बार, दो बार, तीन बार या हर घंटे? आइए जानते हैं, सेक्स के बारे में सोचने में महिलाएं पुरुषों की तुलना में कहां खड़ी हैं,

महिलाएं पुरुषों से पीछे हैं, पर एकदम से पीछे नहीं हैं महिलाएं स्वभाव से शर्मीली भले हों, वे अपनी सेक्शुअल डिजायर को व्यक्त करने में संकोच भले करती हों, पर सेक्स के बारे में सोचने में वे पुरुषों से बहुत पीछे नहीं हैं। कई रिसर्च के दौरान मिले आंकड़ों का औसत निकालने पर पाया गया है कि महिलाएं दिन में 18.6 बार सेक्स के बारे में सोचती हैं।  यहां 18.6 को आप 18 या 19 मान सकते हैं।
नहीं तो आप कहेंगे यह डेसिमल में (0.6) में सोचना क्या है? खैर, अगर इस आंकड़े को मिनट में बदला जाए तो कह सकते हैं कि हर 51 मिनट में एक बार महिलाओं के मन में सेक्शुअल ख्‍याल आते हैं।
इसे नेगेटिव ढंग से न लें
बहुत से लोग, जो अब भी सेक्स के बारे में बात करने को बुरा मानते हैं, वे महिलाओं द्वारा सेक्स के बारे में सोचने को नकारात्मक ढंग से लेते हैं, पर इस सोच को बदलने की जरूरत है। सेक्स का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग होता है।
सबसे बड़ी बात हमें यह समझना होगा कि सेक्स के बारे में बात करने या सोचने में कुछ भी ग़लत नहीं है। यह हमारे शरीर की एक प्राकृतिक ज़रूरत और स्वाभाविक गतिविधि है। हमें अपने शरीर की ज़रूरत के बारे में सोचने में शर्म किस बात की होनी चाहिए? जबकि ख़तरे की स्थिति तब पैदा हो सकती है, जब आप अपनी इच्छाओं का ज़बरदस्ती दमन करने लगते हैं।
ऐसा करके हम कई मनोरोगों को निमंत्रण देना शुरू कर देते हैं तो अगर आपके मन में भी सेक्स के ख़्याल आते हैं तो उसे नकारात्मक ढंग से न लें।
महिला और पुरुष में लगभग आधे का अंतर क्यों है? जहां पुरुष दिन में 34 बार सेक्स के बारे में सोचते हैं, महिलाएं औसतन 18 बार यानी आप कह सकते हैं, यह अंतर लगभग आधे का है।
इसका कारण क्या है? रिसचर्स के अनुसार इस अंतर का मुख्य कारण सेक्स हार्मोन टेस्टेस्टेरॉन है। हम सभी जानते हैं कि सेक्स की इच्छा का टेस्टेस्टेरॉन के लेवल से सीधा संबंध है।
यह हार्मोन महिलाओं की तुलना में पुरुषों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। संभवत: यह भी कारण हो सकता है कि पुरुष सेक्स के बारे में ज़्यादा सोचते हैं। वहीं एक रिसर्च में यह बताया गया कि टेस्टेस्टेरॉन के अलावा भी कई कारण हैं, जो पुरुषों के दिमाग़ में सेक्स की कल्पना औसतन ज़्यादा बार घूमती रहती है।
पुरुष शारीरिक संतुष्टि के बजाय अपने ईगो को संतुष्ट करने के लिए सेक्शुअल गतिविधियों का सहारा लेते हैं, जबकि महिलाएं सेक्स में प्यार की तलाश करती हैं। आप शरीर की ज़रूरत को संतुष्ट कर सकते हैं, पर ईगो को पूरी तरह कभी संतुष्ट नहीं किया जा सकता। इसीलिए पुरुष सेक्स के बारे में ज़्यादा सोचते रहते हैं।
वे अपने पार्टनर के नंबर को बढ़ाने को लेकर ज़्यादा जोड़तोड़ करते हैं, जबकि महिलाएं अपने एक ही पार्टनर से संतुष्ट होने के बारे में ज़्यादा सोचती हैं।

 

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