थोड़ी सी सावधानी से स्वस्थ बने रह सकते हैं

तंदुरुस्ती लाख नियामत वाली कहावत बुजुर्गों से सुना करते थे। आज भी वह उतनी ही प्रासंगिक है, खास तौर पर आज के उस आधुनिक युग में जहां मानव के स्वास्थ्य पर चौतरफा हमले हो रहे हों। इलेक्ट्राॅनिक युग में जीने का गौरव भले ही हमें हासिल हो पर सांस लेने के लिए शुद्ध हवा का यहां नितांत अभाव है। हरियाली के तो कहीं-कहीं दर्शन होते हैं। पहले के समय में बुजुर्ग जल्दी सोने, जल्दी उठने, प्रात: कालीन भ्रमण, व्यायाम करने और पौष्टिक खुराक लेने पर जोर दिया करते थे। आज के मशीनी युग में लोगों के न सोने का समय निश्चित है और न ही जागने का। जहां हर चीज में मिलावट का बोलबाला हो, वहां पौष्टिक खुराक ले पाना तो महज एक सपना सा लगता है। चारों ओर का वातावरण इतना प्रदूषित है कि उसमें सांस लेते-लेते न जाने कितनी व्याधियां शरीर में प्रवेश कर चुकी हैं। जहां तक व्यायाम का प्रश्न है तो व्यायामशालाएं तो नाममात्र की रह गई हैं उनकी जगह हेल्थ क्लीनिकों ने ले ली है।बढ़ा हुआ पेट कम करना हो, शरीर की मांसपेशियों में उभार लाना हो या फिर मोटापा कम करना हो, इसके लिए हेल्थ क्लीनिकों में सभी साधन सुलभ हैं।

सुखी तन और पुलकित मन

मानव का यदि सुखी तन और पुलकित मन रहे तो अपेक्षाकृत वह ज्यादा चुस्ती-फुर्ती और कुशलता से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं कि वह नियमित रूप से औषधियों का सेवन करता रहे। जरूरत सिर्फ इतनी ही है कि वह अपने स्वास्थ्य के प्रति निरंतर सचेत रहे और मौसम के बदलाव के अनुसार अपने खान-पान में भी तब्दीली करता रहे। इस ओर थोड़ा सा ध्यान देना फायदेमंद साबित हो सकता है। गर्मी के दिनों में लू से बचना बहुत जरूरी है। खाली पेट घर से कभी नहीं निकलना चाहिए। हमेशा पानी पीकर ही निकलें। अच्छा तो यह होगा कि कच्चे आम का पन्ना पीकर निकलें या शर्बत इत्यादि पीयें। गुड़ और सत्तू (भुने हुए जौ-चने का पाउडर) का सेवन भी लू से बचाने में सहायक होता है।

पुदीने का सेवन

इस मौसम में पुदीने का सेवन तो यों भी बहुत जरूरी है। पुदीने में ढेर सारे गुण भरे हैं।दवा बनाने के लिए चीन और जापान और अपने यूनानी वैद्य-हकीम बरसों से पुदीने का इस्तेमाल करते चले आ रहे हैं। उन लोगों ने पुदीने की तासीर को पहचाना था, क्योंकि इसमें कई विटामिन और खनिज प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। कच्चा पुदीना चबा लेना ही पर्याप्त है। इससे मुंह का स्वाद तो ठीक रहता ही है, साथ मुंह की ताजगी भी बरकरार रहती है। थोड़ा हल्के व्यायाम पर भी ध्यान दिया जाए तो शरीर को स्वस्थ बनाए रखना संभव है। ऊर्जा बनाए रखने के लिए व्यायाम किसी टॉनिक से कम नहीं है। (स्वास्थ्य दर्पण) – संजय कुमार चतुर्वेदी प्रदीप

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