थोड़ी सी सावधानी आपको मलेरिया और डेंगू से बचा सकती है

इस बीमारी से बचने का एकमात्र उपाय मच्छरों का सफाया करना है और यह कार्य सभी के सहयोग से एक जनजागृति मुहिम द्वारा ही संभव है। हमें यह जान लेना जरूरी हो गया है कि मच्छरों से मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां फैलती हैं। लापरवाही बरती जाने पर ये बीमारियां मौत का कारण तक बन सकती है। जून के महीने से ही हमारे देश में मानसून सक्रिय हो जाता है और बारिश शुरू हो जाती है। दक्षिण भारत में नवम्बर महीनों में भी बारिश पड़ती है। चूंकि बरसात का मौसम मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल समय है, इसलिये मानसून के दस्तक देते ही मच्छरों से निपटने के लिए तैयारियां शुरू हो जाती हैं। दुर्भाग्यवश हमारे देश में जैसी तैयारियां होनी चाहिए, वे नहीं हो पाती और इधर-उधर गंदा पानी ठहर जाता है और जमा हो जाता है और मच्छरों को मौका मिल जाता है। हमारे देश की भौगोलिक स्थिति और जलवायु संबंधी परिस्थितियां मलेरिया प्रसार के लिए काफी अनुकूल हैं। अत्यधिक ठंड और गरमी में मच्छर जीवित रह नहीं सकते। नम वातावरण में मच्छर अधिक सक्रिय होते हैं।
दो प्रकार से मच्छरों की सहायता करती है बरसात
बरसात दो प्रकार से मच्छरों की सहायता करती है। प्रथम, मच्छरों के प्रजनन के लिए पानी उपलब्ध कराती है, दूसरी बात यह कि बरसात से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ती है जो मच्छरों के जीवन के लिए अनुकूल होती है। गड्ढे, पानी का अनियोजित निकास, सिंचाई की नालियां और परियोजनाएं मच्छरों के प्रजनन में सहायक होकर मलेरिया को बढ़ाती हैं। मलेरिया से बचने के कुछ उपाय हैं जिन्हें यदि हम अमल में लाएं तो मलेरिया का खतरा कम कर सकते हैं। पानी को एक जगह इकट्ठा न होने दें। इकट्ठा हुआ पानी ही मादा एनाफिलीज मच्छर के अंडे देने का आधार बनता है। इसलिए मच्छर को पैदा होने से रोकने के लिए-
– पानी की टंकी पर ढक्कन सही ढंग से लगवाएं।
– घर के आसपास के गड्ढों में पानी इकट्ठा न होने दें।
– नालियां साफ रखें।
– पानी के बरतन को ढंक कर रखें।
– घर के खिड़की-दरवाजों पर जाली लगवाएं।
– बेकार पड़े टायरों में पानी जमा न होने दें।
– जब कूलर का प्रयोग न करें, तो उसका पानी निकालकर कूलर खाली कर दें और कपड़े से पोंछकर अखबारी कागज से कूलर लपेट कर रखें।
– छत की टंकियों और सजावटी फव्वारों की समय-समय पर सफाई करते रहें।
– मच्छरों को भगाने के लिए नीम की सूखी पत्तियां जलाएं। अगरबत्ती, धूप और हवन सामग्री आदि इस्तेमाल में लाएं।
– मच्छरों से छुटकारा पाने के लिये कमरों, स्टोर और रसोईघर में कीटनाशक दवाएं छिड़कवाएं।
– रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
– घर के कमरों को बंद कर दें और पंखा-कूलर बंद कर टिकियां जलाएं। जब टिकिया का धुआं सारे घर में फैल जाए, तभी पंखा चालू करें।
डेंगू भी कम खतरनाक नहीं !
डेंगू भी मच्छर से फैलने वाली बीमारी है। हर वर्ष इसके प्रकोप से भी हजारों लोग मरते हैं। डेंगू एक तरह का वायरल बुखार है। इसके दौरान रोगी को अचानक तेज बुखार होता है, तेज सिरदर्द होता है, आंखों के पीछे, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होता है। यह एक संक्रामक रोग है जो तेजी से फैलता है।
ये हैं दर्द डेंगू के लक्षण
तेज सिरदर्द, जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर में दर्द डेंगू के लक्षण हैं। कभी-कभी लगातार पेट में भी दर्द होता है और उलटियां भी शुरू हो जाती हैं। डेंगू फैलाने वाले मच्छर से बचने के उपाय वही हैं जो मलेरिया से बचने के लिए उठाए जाते हैं। मलेरिया और डेंगू का पता तो चिकित्सक ही लगाते हैं। वे ही विभिन्न जांचों के बाद निष्कर्ष निकालते हैं कि बुखार से पीड़ित व्यक्ति मलेरिया अथवा डेंगू से पीडि़त है अथवा नहीं। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करके भी आप समय पर चिकित्सा सेवा एवं औषधि प्राप्त कर सकते हैं। नगरसेवकों को अपने-अपने वार्ड की साफ-सफाई व्यवस्था के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए। पर्यावरण जितना अधिक साफ सुथरा होगा, मलेरिया व डेंगू फैलाने वाले मच्छर उतना ही कम प्रकोप ढहायेंगे। मनपा की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह नगरों की साफ-सफाई की सही ढंग से व्यवस्था करें। कीटनाशक का समय-समय पर छिड़काव करें। आमतौर पर मलेरिया में जटिलता दिमागी मलेरिया (फैल्सी प्रेरक मलेरिया) होने पर पैदा होती है।
मलेरिया से बचने का एक कारगर उपाय
प्रतिदिन तुलसी की आठ-दस पत्तियां खाना है। मलेरिया से पी‌ड़ित व्यक्ति को एक गिलास पानी में एक चम्मच कुटी दालचीनी, एक चुटकी काली मिर्च और शहद डालकर उबालें और दें। अंग्रेजी दवाएं मलेरिया की पुष्टि होने पर ही दें। पुष्टि होने पर पांच दिन दवा नियमित लेनी चाहिए। मलेरिया की आशंका होने पर क्लोरोक्विन गोली ली जा सकती है। गोली दूध के साथ दें।मलेरिया से पीड़ित रोगी को हल्का भोजन यानी खिचड़ी, सूजी की खीर, फलों का जूस और दूध कॉर्नफ्लेक्स सहित दे सकते हैं। क्लोरोक्विन, मेफलोक्किन रडॉक्सीसाइक्लिन दवा मलेरिया में फायदेमंद साबित होती है। मच्छरों से बचने हेतु हर संभव करना ही स्वास्थ्य हेतु उचित होगा।

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