ज्वर होने पर घबराएं नहीं, हर ज्वर कोरोना नहीं

मानसून की शुरुआत के साथ मौसमी बीमारियां भी बढ़ने लगी हैं। जलजमाव की समस्या के कारण मलेरिया व डेंगू बुखार का प्रकोप भी धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। इस मौसम में वायरस भी काफी सक्रिय हो जाते हैं, जिसकी वजह से वायरल फीवर का प्रभाव प्रत्येक घरों में देखा जा रहा है। बरसात एवं गर्मी के मौसम में कुछ जलजनित बीमारी जैसे गैस्ट्रोइंट्राइटिस, टायफायड जैसी बीमारियां भी अपना प्रभाव दिखा रही हैं। अब सवाल ये है कि इन सब बीमारियों के बीच मलेरिया, डेंगू, वायरल, टायफायड, गैस्ट्रो- इनट्राइटिस, निमोनिया, यूरिन इन्फेक्शन व कोरोना वायरस सब में बुखार जरूर आता है। इस कोरोना काल में ज्वर को कैसे अलग करें यह हम सब के लिए जानना जरूरी है। सही जानकारी व जागरूकता से ही ऐसे ज्वर को चिन्हित किया जा सकता है।
यह करें उपाय
– सबसे पहले ज्वर हो तो घबराएं नहीं। ज्यादा चिंता करके तुरंत अस्पताल या डॉक्टर के क्लिनिक में न जाएं। अपने फैमिली डॉक्टर से टेलीफोन पर सलाह लें। दिन में तीन बार करके पैरासिटामॉल लें और बुखार के पैटर्न को चार घंटे के अंतर से नोट करें।
– ठंड के साथ काफी तेज बुखार एक दिन छोड़ कर आता है तो दुनिया में मलेरिया के अलावा कोई दूसरा बुखार नहीं होता है। लेकिन ठंड के साथ दिन में दो-तीन बार तेज बुखार आता है तो फेलसिपेरम मलेरिया बुखार होने की संभावना होती है। ऐसे में डॉक्टर को दिखाकर ब्लड टेस्ट कराएं। एन्टि मलेरिया की दवा लें।
– डेंगू बुखार में थोड़ी ठंड के साथ तेज बुखार और पूरे शरीर में बहुत ज्यादा दर्द, हड्डियों एवं जोड़ों में दर्द रहता है। सबसे ज्यादा आंखों के पिछले भाग में दर्द एवं शरीर में रैशेज (दाग) नजर आते हैं। ऐसे में चिकित्सकीय परामर्श पर एनएस- 1 एंटिजेन टेस्ट और बार-बार प्लेटलेट टेस्ट कराना चाहिए। इसमें पानी ज्यादा पीएं, प्लेटलेट अगर दस हजार से कम हो तो प्लेटलेट चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
– केवल सूखी खांसी एवं छींक आती है तो वायु प्रदूषण का प्रभाव हो सकता है। इसका इलाज है एन्टि एलर्जी की दवा।
– खांसी के साथ बलगम आना, छींक आना, और नाक बहना साथ ही सामान्य सर्दी या जुकाम के साथ ज्वर, शरीर में दर्द एवं कमजोरी यानी कि फ्लू या वायरल फीवर हो सकता है। इसे कोरोना न समझकर डॉक्टर की सलाह पर दवा लें। ऐसे ज्यादार मामलों में पैरासिटामोल और एन्टि एलर्जी की दवा ही कारगर होती है।
– सूखी खांसी, शरीर में दर्द, कमजोरी, थोड़ा तेज बुखार ( 99’F to 101 ‘F) ,सांस लेने में कठिनाई और पांच- छह दिन या उससे ज्यादा बुखार का बने रहना ,स्वाद एवं सुगंध में कमी कोरोना संक्रमण का संकेत हो सकता है। इसके लिए कोविड-19 आरटी पीसीआर टेस्ट करवाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह कारगर है।
– कोरोना संक्रमण मरीज के सम्पर्क आना, विदेश या देश में यात्रा लेकिन कोई भी बीमारी के लक्षण न होना गैर लक्षण के पाजिटिव रिपोर्ट आने पर इलाज हल्के लक्षण वाले मरीज के लिए 14 दिन आइसोलेशन, जिन्क विटामिन, विटामिन सी, डॉक्टर की सुझाई दवा लें।
– टायफायड में बराबर बुखार बना रहता है, बेस लाइन को टच नहीं करता है। डॉक्टरी सलाह लेकर दवा लें।
– यूरिन इन्फेक्शन के कारण भी बुखार होता है। इसका लक्षण है यूरिन में जलन एवं बार-बार यूरिन जाना, इसके अलावा ठंड के साथ बुखार आना। इसमें यूरिन की जांच रूटीन एवं कल्चर कराएं। साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटिबॉयोटिक दवा लें।
– निमोनिया में सूखी या बलगम के साथ खांसी, हल्का या तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या भारीपन, कमजोरी, बैचैनी, आक्सीजन का लेबल गिर जाना एवं मरीज की उम्र ज्यादा कोरोना संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार अस्पताल में भर्ती हो सकते हैं। घर में भी रहकर इलाज करवा सकते हैं।

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