चूड़ा-दही भोज में राजग ने दिखाई एकजुटता, लालू आवास में रहा सन्नाटा

पटना : बिहार में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बुधवार को मकर संक्रांति के अवसर पर ‘दही-चूड़ा’ भोज के बहाने जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने एकजुटता दिखाई वहीं ऐसे ‘सियासी भोज’ से सबका ध्यान खींचने वाले ‘लालू आवास’ में सन्नाटा पसरा रहा।
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी समेत मंत्रिमंडल के सदस्य तथा भारतीय जनता पार्टी और जदयू के कई नेता शामिल हुए। इस भोज में दरभंगा के केवटी से राजद के विधायक फराज फातिमी के पहुंचने से राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गयी। फातमी राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे दरभंगा से सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके अली अशरफ फातमी के पुत्र हैं। अशरफ फातमी ने पिछले साल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में आस्था जताते हुए जदयू का दामन थाम लिया था। विधायक फातमी से जब पत्रकारों ने बातचीत की तब उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर प्रशंसा की और कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार से बड़ा चेहरा कोई नहीं है। उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार ही बिहार में फिर से सरकार बनायेंगे। फातमी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से ‘पोल खोल यात्रा’ पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा, ‘मुझे नहीं पता कि वह (तेजस्वी यादव) एनआरसी के खिलाफ रैली क्यों निकाल रहे हैं, जब राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इसे राज्य में लागू नहीं करेंगे।’ फराज फातमी ने कहा कि उनके आज यहां आने का कोई राजनीतिक मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मौके पर आमंत्रण दिए जाने पर लोग एक-दूसरे के घर जाया करते हैं और बधाई देते हैं। एनआरसी को लेकर बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रुख के बारे में प्रतिक्रिया पूछे जाने पर फातमी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह एनआरसी के खिलाफ हैं, ऐसे में इस बात को आगे बढ़ाना उचित नहीं है। गौरतलब है कि राजद नेता तेजस्वी यादव सीएए और एनआरसी के विरोध में गुरुवार से बिहार में दौरा करने वाले हैं। इस बारे में पूछे जाने पर फातमी ने कहा कि वह ऐसा करके गलत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के अपना रुख स्पष्ट कर दिए जाने पर उन्हें भी अपने निर्णय पर फिर से विचार करना चाहिए। मकर संक्रांति के अवसर पर शहर स्थित सदाकत आश्रम में आयोजित समारोह में भाग लेते हुए तेजस्वी ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि एनपीआर जो कि एनआरएसी को लेकर पहला कदम है, उसे तो वह रोक नहीं पाए। तेजस्वी ने कहा, ‘उनके (नीतीश के) मन में छल-कपट तो है ही। मामले को टालना था, उन्होंने टाला पर वे कितने दिनों तक टालेंगे। बिहार की जनता देख रही है कि कैसे यह पार्टी (जदयू) और उसके नेता अपने दल के संविधान को नहीं मानते।’

नहीं हुआ लालू प्रसाद के यहां चूड़ा-दही भोज का आयोजन
वहीं, कभी मकर संक्रांति के चूड़ा-दही भोज से सबका ध्यान खींचने वाले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के आवास पर सन्नाटा नजर आया। लालू यादव के रहने पर यहां बड़े सियासी चेहरों का जुटान होता था। आवास के दरवाजे आम लोगों के लिए भी खोल दिए जाते थे लेकिन चारा घोटाला मामले में उनके जेल में होने के कारण उनकी गैर-हाजिरी में राजद की ओर से भोज का आयोजन नहीं किया गया। विपक्षी महागठबंधन के नेताओं का जुटान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदनमोहन झा की ओर से प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित भोज में हुआ। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतनराम मांझी, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के अध्यक्ष मुकेश सहनी भोज में पहुंचे लेकिन राजद की ओर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का नहीं आना चर्चा का विषय बना।

नीतीश ने सीएए-एनआरसी पर प्रश्न को हाथ जोड़कर मुस्कुराते हुए टाल दिया
पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से जुड़े प्रश्न पर मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर टाल दिया।
मकर संक्रांति के अवसर पर यहां आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आज के दिन उस विषय की चर्चा मत करिए जिसमें लगे कि अलग-अलग सोच और झगड़े का माहौल है। शहर के हॉर्डिंग रोड स्थित जदयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के आवास पर मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री ने सीएए-एनआरसी को लेकर पूछे गए प्रश्न को मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर टाल दिया और कहा कि मकर संक्रांति पर आपस में प्रेम एवं सद्भावना का भाव होता है। उन्होंने ‘जल जीवन हरियाली’ के प्रति लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए 19 जनवरी को मानव शृंखला में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि आपको जितनी और जो भी बात करनी हो, चाहे वह मुद्दा कुछ भी हो, उस पर आप 19 जनवरी को बात करिएगा।

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