चीन छोड़कर भारत आएंगी फैक्टरियां

नयी दिल्ली : चीन से दुनिया का पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग हब होने का तमगा छिन सकता है। कोरोना वायरस महामारी के कारण पैदा हुई दिक्कतों के बीच लगभग 1000 विदेशी कंपनियां सरकार के अधिकारियों से भारत में अपनी फैक्टरियां लगाने को लेकर बातचीत कर रही हैं। इनमें से कम से कम 300 कंपनियां मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज, टेक्सटाइल्स तथा सिंथेटिक फैब्रिक्स के क्षेत्र में भारत में फैक्टरियां लगाने के लिए सरकार से सक्रिय रूप से संपर्क में हैं। बातचीत सफल होती है तो चीन के लिए बड़ा झटका होगा।एक अधिकारी ने कहा, ‘1000 कंपनियां विभिन्न स्तरों जैसे इन्वेस्टमेंट प्रमोशन सेल, सेंट्रल गवर्नमेंट डिपार्टमेंट्स और राज्य सरकारों के साथ बात कर रही हैं।

300 कंपनियों को लक्षित किया गया

इन कंपनियों में से हमने 300 कंपनियों को लक्षित किया है। जापान, अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया जैसे कई देश चीन पर हद से ज्यादा निर्भर हैं और यह साफ दिख रहा है।’सरकार ने किए कई उपायदेश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल सितंबर में एक बड़े फैसले के तहत कॉर्पोरेट टैक्स को घटाकर 25.17 फीसदी कर दिया था। नयी फैक्टरियां लगाने वालों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स को घटाकर 17 फीसदी पर ला दिया था, जो दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे कम है। कॉर्पोरेट टैक्स रेट में कटौती के साथ-साथ देशभर में लागू जीएसटी से भारत को उम्मीद है कि वह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अच्छा-खासा निवेश आकर्षित करेगा।

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