चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार उतरेगा कोई यान, इंसानों का रुकना आसान होगा

नई दिल्ली: भारतीय वैज्ञानिक पूरी कोशिश कर रहे हैं कि चांद पर इंसानों के रहने का सपना पूरी हो सके। इसी प्रयास को आगे बढ़ाने की दिशा में चंद्रयान-2 को पहली बार चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। अब तक यह क्षेत्र वैज्ञानिकों के लिए अनजान बना हुआ है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के रूप में पानी होने की संभावना ज्यादा है और अगर ऐसा होता है तो चांद पर इंसानों के रहने का सपना पूरा हो जाएगा। इतना ही नहीं ऐसा होने पर यहां बेस कैंप बनाया जा सकेगा और साथ ही चांद पर शोधकार्य के साथ-साथ अंतरिक्ष में नई खोज करने का मौका भी मिलेगा।
नहीं पहुंचतीं सूर्य की किरणें
चूंकि हम चांद के दक्षिणी ध्रुव की बात कर रहे हैं तो जाहिर सी बात है कि यहां सूर्य की किरणें नहीं पहुंचतीं हैं। दरअसल, होता ये है कि अगर कोई इंसान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर खड़ा है तो उसे सूर्य क्षितिज रेखा पर दिखाई देगा, ऐसे में सूर्य चांद की सतह से लगता हुआ और चमकता हुआ दिखाई देगा। सूर्य की किरणें यहां सीधी नहीं पड़ती और इसी कारण यहां तापमान कम रहता है।
क्या कहा स्पेस इंडिया के प्रशिक्षण प्रभारी ने
स्पेस इंडिया के प्रशिक्षण प्रभारी तरुण शर्मा कहा कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होता। यही कारण है कि वहां पर पानी मिलने की संभावना सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि “चांद का जो भाग सूर्य के सामने आता है, वहां का तापमान 130 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है। इसी तरह से चांद के जिस हिस्से पर सूरज की रोशनी नहीं आती, वहां तापमान 130 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। लिहाजा, चांद पर हर दिन तापमान बढ़ता-चढ़ता रहता है।”
इसलिए नहीं रूक पाते चांद पर
तरुण शर्मा बताया कि चांद पर पानी न होने के कारण ही वहां अंतरिक्षयात्री ज्यादा दिन नहीं रुक पाते। चंद्रयान-2 अगर यहां बर्फ खोज पाता है, तो यह समस्या खत्म हो जाएगी। बर्फ से पीने के पानी और ऑक्सीजन की व्यवस्था हो सकेगी। इससे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए लम्बे समय तक चांद पर रुकना संभव हो सकेगा।

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