चंद्रमा, सेहत और ध्यान

ऋग्वेद में कहा गया है कि ‘चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत:।’ अर्थात चंद्रमा जातक के मन का स्वामी होता है। मन का प्रभाव शरीर पर पड़ता है। जैसा हमारा मन होगा, वैसा ही हमारा शरीर होगा। मन यदि स्वस्थ है तो हमारा शरीर भी ठीक रहेगा और मन बीमार है तो हमारा शरीर भी बीमार ही हो जायेगा । अब प्रश्न यह है कि क्या पूर्ण चंद्रमा हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है ? आइये जानें-
सूर्य और चन्द्रमा की वजह से हमारा जीवन सुचारु रूप से चलता है। ज़ाहिर है इनका असर हमारे आसपास के वातावरण पर पड़ता है। इन्हीं की वजह से पृथ्वी पर दिन और रात होते हैं और इन्हीं के अनुसार साल का विभाजन किया गया है। लेकिन चनद्रमा के पृथ्वी के पास होने की वजह से खास तौर पर हमारे आसपास कई परिवर्तन होते हैं। वहीं यह भी देखा गया है कि चन्द्रमा का असर पृथ्वी पर सबसे ज़्यादा पूर्णिमा के दिन पड़ता है क्योंकि इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के एकदम करीब तो होता ही हैं, साथ ही इस दिन चंद्रमा पूर्ण भी रहता है। यह साबित हो चुका है कि इसका असर इंसानों पर भी पड़ता है। इसलिए हमारी सेहत पर भी इसका असर साफ़ देखा जा सकता है।
जहां एक ओर सूर्य की गति के अनुसार हमने दो अयन-उत्तरायण और दक्षिणायन बनाए हैं, उसी प्रकार चन्द्रमा के अनुसार दो पक्षों- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का निर्माण किया गया है। ये पक्ष महीने के 30 दिनों को चन्द्रमा की गति के अनुसार दो भागों में विभाजित करते हैं। 15-15 दिनों के इन पक्षों में अमावस्या और पूर्णिमा आती हैं। पूर्णिमा ही वह दिन होता है जब हमारे स्वास्थ्य में बड़े बदलाव देखे जाते हैं। जानते हैं कैसे-
ऐसे पड़ता है पूर्णिमा का असर
दरअसल पूर्णिमा के दिन चांद पृथ्वी के सबसे नज़दीक होता है और ये पूरा चांद पृथ्वी के पानी के स्तर को ऊपर खींचता है। इससे ही हाय टाइड या ज्वार-भाटा कहा जाता है। इसी तरह मनुष्य का शरीर भी 85 प्रतिशत पानी से बना हुआ है, इसलिए मनुष्य के शरीर में भी पानी की गति और गुण बदल जाते हैं। इसका असर सीधा हमारी सेहत पर पड़ सकता है। इसकी वजह से मन में बेचैनी और नींद की कमी के साथ-साथ भावनात्मक असंतुलन देखी जा सकती है। इसका असर हमारे पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर सकता है। साथ ही लोगों को सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या हो सकती है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक ?
वैज्ञानिकों की मानें तो चन्द्रमा का प्रभाव मनुष्य शरीर पर तेज़ी से पड़ता है। पूर्णिमा के दिन मनुष्य के शरीर के रक्त के न्यूरॉन सेल्स में तेज़ी देखी जाती है, जिससे सामान्य की तुलना में उत्तेजना में बढ़ोतरी हो जाती है। यह असर हर पूर्णिमा को देखा जा सकता है।
पाचन-तंत्र
ऐसा अध्ययन में पाया गया है ​िक जिनकी पाचन क्रिया सामान्य की तुलना में मंद होती है और जिन लोगों को खाने के बाद नींद और नशे जैसा महसूस होता है, ऐसे लोगों पर पूर्णिमा का प्रभाव मुख्य रूप से देखा जाता है। पूरे चांद की वजह से इन लोगों के शरीर में न्यूरॉन सेल्स और भी कम गति से काम करते हैं, जिसकी वजह से पाचन-तंत्र में समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसलिए पूरे चांद की स्थिति में इन लोगों को डिटॉक्सिफिकेशन या उपवास करने की सलाह दी जाती है। इस तरह पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा की स्थिति का मनुष्य के शरीर पर साफ़ तौर पर प्रभाव देखा जा सकता है।
ध्यान का महत्व
ऐसे में शारीरिक और मानसिक विकारों को दूर करने में ध्यान की अहम भूमिका होती है। ध्यान एकाग्रता का चरम रूप है। यह आपके मन को एकाग्रचित्त करने में मदद करता है और आपको सभी सांसारिक वस्तुओं से अलग करता है। ध्यान योग के 8 अवयवों में से एक है। यह माना जाता है कि सभी दिव्य शक्तियाँ आपके हृदय में रहती हैं और केवल ध्यान आपके मन में गहराई से विचार करने का एकमात्र मार्ग है। हालांकि ध्यान आपकी सभी समस्याओं का हल नहीं है लेकिन यह निश्चित रूप से शरीर और आत्मा के बीच में एक सामंजस्य है।
ध्यान’ चेतन मन की एक प्रक्रिया है जिसमें साधक अपनी चेतना बाह्य जगत के किसी चुने हुए दायरे या स्थल विशेष पर केन्द्रित करता है। इसे अंग्रेजी में ‘अटेंशन’ कहते हैं। योग सम्मत ध्यान और सामान्य ध्यान में अंतर है। योग सम्मत ध्यान लम्बे समय के अभ्यास के परिणाम स्वरूप आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर ले जाता है और सामान्य ध्यान भौतिक शक्ति की वृद्धि करता है। लोग सदियों से ध्यान-अभ्यास को अपने जीवन में ढालते रहे हैं। आज जबकि लोगों को इसके नये और विविध लाभ पता चलते जा रहे हैं, तो इसकी प्रसिद्धि में भी बढ़ोतरी हो रही है। यह तो सिद्ध हो चुका है कि ध्यान-अभ्यास हमारे शरीर, मन और आत्मा दोनों को लाभ पहुंचाता है। परंतु आज लोग इसके एक अतिरिक्त लाभ के बारे में जान रहे हैं- अपने अंदर नवीन ऊर्जा जागृत करने से अवर्णनीय लाभ मिलता है। डॉक्टर हमें बताते हैं कि तनाव हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत हानिकारक प्रभाव डालता है। ध्यान करने से हमारा शरीर पूरी तरह से शांत हो जाता है और हमारा समस्त तनाव दूर हो जाता है। परीक्षण बताते हैं कि ध्यान-अभ्यास के दौरान हमारी दिमागी तरंगें धीमी होकर एक संतुलित स्तर पर कार्य करने लगती हैं, जिससे कि हमें पूरी तरह से शांत होने का एहसास होता है। इससे शरीर को अनेक लाभ मिलते हैं, जैसे कि बेहतर नींद आना, रक्तचाप में कमी आना, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और पाचन प्रणाली में सुधार आना, तथा दर्द के एहसास में कमी आना। ज्योति ध्यान-अभ्यास करने से ये सभी लाभ हमें अपने आप ही प्राप्त हो जाते हैं। दिन भर में हमारे मन में विचार चलते रहते हैं। जब हम ध्यान-अभ्यास करने के लिये बैठते हैं और अपने ध्यान को आत्मा या कहीं पर एकाग्र होने की क्षमता में इस बढ़ोतरी से, तथा साथ ही तनाव में कमी, ऊर्जा में वृद्धि, और रिश्तों में सुधार आने से हम सांसारिक कार्यों में भी सफलता प्राप्त करते हैं। हम पहले से अधिक कार्यकुशल और उत्पादक हो जाते हैं।
मनुष्य का जीवन तनाव से भरा है जो कि हमारे दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों पर प्रभाव डालता है। जानते हैं ध्यान के फायदे-
-ध्यान हमारे शरीर में तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके तनाव को कम करने में मदद करता है। ध्यान से कॉरटिसोल जैसे तनाव से संबंधित हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है और सेरोटोनिन जैसे अच्छे रसायनों के उत्पादन में वृद्धि होती है।
– शरीर के उचित क्रियाकलाप के लिए गहरी नींद बहुत महत्वपूर्ण है। जब आपका दिमाग जरूरत से ज्यादा तेजी के साथ काम करता है तो आपको उचित नींद नहीं मिलती। नियमित ध्यान तनाव में राहत प्रदान करता है और इस तरह सोने की गुणवत्ता में सुधार आता है।
– कम तनाव का मतलब अधिक खुशी है। ध्यान करने से खुशी मिलती है और मन व शरीर स्वस्थ रहता है।
– चिंता और उदासी से ग्रस्त लोगों को प्रत्येक दिन 15-20 मिनट ध्यान में देना चाहिए, ध्यान क्रोध को भी नियंत्रित करने में मदद करता है।
– दैनिक ध्यान से आंतरिक स्रोतों से ऊर्जा के लाभ को बढ़ाता है।
– जीवन अनुशासित हो जाता है और चरित्र बल बढ़ता है।
– बेहतर एकाग्रता ध्यान का नतीजा है।
– यह माना जाता है कि ध्यान प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करता है और इससे रक्तचाप को नियंत्रित करने और रक्त कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिलती है।
-ध्यान बुढ़ापे को धीमा कर देता है।
– ध्यान भावनात्मक स्थिरता प्रदान करता है।
ध्यान कैसे करें ?
ध्यान करने के लिए आपको आराम से बैठना चाहिए और एक विचार, वस्तु या यहाँ तक कि अपनी श्वांस पर भी ध्यान देना शुरू करना चाहिए। प्रारंभ में आपका मन भटकेगा लेकिन ध्यान को भटकाने की कोशिश न करें। पिछली बातों को भूल जाएं, किसी भी भावना या विचार को दबाने न दें और इन्हें आगे बढ़ने दें। ऐसा करने से आपका मन अपने उद्देश्य पर ध्यान करने के लिए वापस लौट आयेगा। अब आपका मन शांत होगा और समय के साथ परिवर्तित होगा और बिना किसी समय के आप गहरे एकाग्रता के चरण में प्रवेश करेंगे। ध्यान आपको वर्तमान में ले आता है।
शुरुआत कैसे करें
– सुविधाजनक समय को चुनें |
– शांत स्थान चुनें ।
– आराम से बैठें |
-पेट को खाली रखें |
– इसे वार्मअप से शुरू करें।
– कुछ लंबी गहरी सांसें लीजिये |
– ध्यान के लाभों को महसूस करने के लिए नियमित अभ्यास आवश्यक है।

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