घरेलू उपायों से दांतों की सुरक्षा

किसी भी व्यक्ति के कमजोर दांत होने के लक्षण हैं – दांतों में दर्द, मसूड़ों में सूजन या खून आना, खाने के दौरान असुविधा या तकलीफ का एहसास, मुंह से बदबू आना। रोजाना सुबह उठकर ब्रश करने से ही दांतों को स्वस्थ नहीं रखा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह को स्वच्छ रखने से कैविटी से बचाव होता है और दांत पीले भी नहीं होते और मुंह से बदबू भी नहीं आती। कई शोध से पता चला है कि मुंह से संबंधित समस्याओं के कारण कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी होती हैं जैसे हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी रोग, शुगर और मुंह का कैंसर। दांत को स्वस्थ रखने और इनकी मजबूती के लिए कुछ उपाय जरूरी हैं।
मुलेठी
मुलेठी में मौजूद लिकोरीसीडिन और लिकोरीसोफ्लैवन ए होता है जो कि दांतों और मसूड़ों की सेहत को बिगाड़ने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं। मुलेठी के पाउडर या मुलेठी की लकड़ी का इस्तेमाल दांतों में ब्रश करने के लिए कर सकते हैं।
तुलसी
तुलसी को मुंह में लेने से संक्रमण से बचे रहते हैं और इससे बैक्टीरिया कम होते हैं। इस तरह दांतों में प्लाक, मुंह में बदबू, कैविटी की समस्या नहीं होती है और इससे दांत मजबूत ही बने रहते हैं। तुलसी की पत्तियां खाने के अलावा, तुलसी की पत्तियों को धूप में सुखा लें, फिर इसे पीस लें। इसका पाउडर बनाकर दांतों पर ब्रश करें।
आंवला
विटामिन सी और उन्य पोषक तत्वों से भरपूर आंवला दांतों को मजबूत बनाते हैं। यह मुंह के बैक्टीरिया से बचाने में मदद करते हैं।
पुदीना
एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-सेप्टिक गुणों से भरपूर पुदीना दांत और मसूडों को स्वस्थ रखता है। पुदीने की पत्तियों को पानी में डालें और आधे घंटे गर्म करने के लिए रखें। इसे छान लें। पानी को मुंह में रखकर कुछ मिनट तक कुल्ला करें। इसे रोजाना दोहराने से दांत मजबूत होंगे।
सरसों का तेल और नमक
दांतों की मजबूती और मसूड़ों के स्वास्थ्य के लिए सरसों और नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह एंटी-सेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल होने से बैक्टीरिया से बचाव करते हैं। इसके लिए तीन छोटे चम्मच सरसों के तेल में दो छोटे चम्मच नमक मिलाएं और इस मिश्रण को अंगुली पर लेकर कुछ मिनट के लिए मसाज करें। फिर गुनगुने पानी से कुल्ला करें।
तिल का तेल
तिल के तेल को मुंह में रखें। 20 मिनट तक इसे मुंह में घुमाने के बाद तेल को थूक दें। फिर गुनगुने पानी से कुल्ला करें। उसके बाद ब्रश करें। ऐसा रोजाना करने से मुंह के बैक्टीरिया और हानिकारक कीटाणु मर जाते हैं लेकिन इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि तिल के तेल से गरारे न करें और न ही निगलने की कोशिश करें।
नीम
नीम में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो दांतों को मजबूत बनाने और स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसमें कई तरह के एंटी-सेप्टिक गुण होते हैं। नियमित रूप से नीम से बने माउथवॉश का उपयोग करें।
लौंग का तेल
दांतों में दर्द, मसूड़ों में सूजन होने पर लौंग का तेल प्रभावी होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। लौंग के तेल से नियमित रूप से मालिश करने पर यह दांतों को कमजोर बनाने वाली बैक्टीरिया से लड़ते हैं।
काली मिर्च और हल्दी
काली मिर्च और हल्दी का पेस्ट बनाकर इससे दांतों और मसूड़ों की हल्की मालिश करें। इनमें मौजूद पोषक तत्व दांतों को मजबूत करते हैं। खास बात यह है कि मालिश के बाद लगभग 30 मिनट तक कुछ न खाएं और न पिएं।
फ्लॉस करें
डॉक्टरों का कहना है कि दांतों पर ब्रश करना ही काफी नहीं है। नियमित रूप से फ्लॉसिंग दांतों की समस्याओं को दूर रखने में मदद करेगी। फ्लॉस में दांत साफ करने के लिए एक धागे का इस्तेमाल होता है। इसका इस्तेमाल इसलिए जरूरी है क्योंकि दांतों के बीच के छोटे गैप को प्रभावी रूप से ब्रश साफ नहीं कर सकता है।

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