क्‍या केंद्रीय विद्यालय हिंदुत्‍व को बढ़ावा दे रहे हैं?

नई दिल्लीः केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली प्रार्थनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। याचिकार्ता ने कोर्ट में दलील दी है कि केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली प्रार्थना एक खास धर्म (हिंदुत्व) को बढ़ावा देती है। इसी याचिका पर सुनवाई के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
वकील ने दायर की जनहित याचिका
यह याचिका एक वकील द्वारा दायर की गई है, जिनके बच्चे केंद्रीय विद्यालयों से पास हुए हैं। वकील ने याचिका में कहा है कि ये संविधान के अनुच्छेद 25 और 28 के खिलाफ है और इसे इजाजत नहीं दी जा सकती है। कानूनन राज्यों के फंड से चलने वाले संस्थानों में किसी धर्म विशेष को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक चूंकि केंद्रीय विद्यालय केन्द्र सरकार के अधीन आते हैं इसलिए एक खास धर्म को बढ़ावा देना ठीक नहीं है। 2015 के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में 1,125 केंद्रीय विद्यालय हैं, वहीं विदेश में केंद्रीय विद्यालयों की संख्या तीन है।
सरकार की तरफ से जवाब ‌का इंतजार
वहीं, अगर बात की जाए केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कुल विद्यार्थियों की तो यह संख्या तकरीबन 11 लाख है। अब देखना है कि इस मामले में सरकार की तरफ से क्या जवाब आता है।
संस्कृत की ये प्रार्थनाएं होती हैं
असतो मा सदगमय!
तमसो मा ज्योतिर्गमय!
मृत्योर्मामृतं गमय!

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