कोविड-19 की वजह से रांची में टूटी रथयात्रा की 329 साल पुरानी परंपरा

रांची : झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा की 329 साल पुरानी परंपरा कोरोना वायरस महामारी के कारण इस वर्ष टूट गई। सिर्फ मुख्य पुजारी और उनके तीन अन्य सहयोगियों ने सुबह भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा (तीनों भाई-बहन) की पूजा की। रांची के धुर्वा में जगन्नाथ पहाड़ी पर स्थित पवित्र जगन्नाथ मंदिर में 1692 में प्रारंभ हुई थी। मंदिर के प्रबंधक मनोज तिवारी ने बताया कि मंदिर की स्थापना 1691 में ठाकुर एनीनाथ शाहदेव ने की थी और पहली बार मंदिर प्रांगण में रथयात्रा का आयोजन 1692 में हुआ था। 1692 से प्रारंभ हुई रथयात्रा की परंपरा आज 329 साल बाद कोरोना के कारण टूटी है, इसका हमें खेद है। रथयात्रा इस वर्ष मौसीबाड़ी नहीं ले जायी जा सकी।
डोल मंडप में किया गया भगवान का पूजन
तिवारी ने बताया कि इससे पहले रांची में कभी भी ऐसी स्थिति नहीं आयी थी, जबकि पुरी में मुगलों के चलते अनेक बार रथयात्रा में पहले भी व्यावधान आया है। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित ब्रजभूषणनाथ मिश्र ने बताया कि आज मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा का डोल मंडप (झूले) में पूजन किया गया। इसी प्रकार 9 दिनों तक इनका पूजन डोल मंडप में ही किया जायेगा। रथयात्रा का पूजन 1 जुलाई को पूरा होगा और उस दिन तीनों देवताओं के विग्रह यथा स्थान पहुंचा दिये जायेंगे। मुख्यमंत्री अंतत: मंदिर का कपाट बंद हो जाने के बाद दोपहर सवा दो बजे अपने बच्चों के साथ मंदिर पहुंचे और उन्होंने वहां बाहर से ही भगवान की पूजा की।

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