कोरोना वायरस: डर, तनाव और अकेलापन

कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूरे भारत में 21 दिनों का लॉकडाउन है लोग घरों में बंद हैं और सब कुछ जैसे रुका हुआ है भागती-दौड़ती जिंदगी में अचानक लगे इस ब्रेक और कोरोना वायरस के डर ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है इस बीच चिंता, डर, अकेलेपन और अनिश्चितता का माहौल बन गया है और लोग दिन-रात इससे जूझ रहे हैं। महानगरों में रहने वाले लोग रोज कोरोना वायरस, लॉकडाउन और अर्थव्यवस्था की खबरें पढ़ते हैं। जिनका अपना कारोबार है, दुकान है, रेस्टोरेंट है वह तो इस वक्त बंद पड़ा है लेकिन उनके खर्चे पहले की तरह ही चालू हैं।
आगे उम्मीद नहीं दिखती
ऐसे लोगों का कहना है, “हमारा बिजनेस तो लॉकडाउन के कारण पहले ही धीमा हो गया था, उसके बाद पूरी तरह बंद हो गया।
अब तो एक महीना होने को आ गया है, लेकिन आगे क्या होगा, पता नहीं एक बिजनेसमैन होने के नाते अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देना ही है, लेकिन खर्चे बांटने वाला कोई नहीं है यह सब सोचकर किसी की भी चिंता बढ़ जाती है, पहले कोरोना और फिर आगे बारिश, उम्मीद नहीं दिखती।” कई लोग मौजूदा स्थिति में डरा हुआ या अकेला महसूस कर रहे हैं। महिलाएं मौजूदा स्थितियों में अपने पति और बच्चों के साथ घर में रह रही हैं।
ऐसी महिला कहती हैं, “शुरू में तो अच्छा लगा कि पूरे परिवार के साथ रह पाएंगे और उस वक्त कोरोना वायरस का डर भी ज्यादा नहीं था लेकिन, अब रोज-रोज खबरें देखकर डर लगता है कि हमारा क्या होगा। हमें बार-बार लगता है कि कहीं परिवार में किसी को कोरोना वायरस हो गया तो क्या होगा, अगर लॉकडाउन पूरी तरह से खोल दिया गया तो सब लोग क्या करेंगे आदि आदि। इसके अलावा कोरोना वायरस का भय हमारे दिमाग पर छाया रहता है।” कई लोग तो इस वक्त अपने घरों और दोस्तों से भी दूर हैं अकेले ही हालात से निपट रहे हैं। एक कमरे में बंद अनिश्चित भविष्य के बारे में सोचकर लोगों की मानसिक दिक्कतें बढ़ी हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने वाले मनोवैज्ञानिकों का कहना है, “लोगों के लिए पूरा माहौल बदल गया है अचानक स्कूल, ऑफिस, बिजेनस बंद हो गए, बाहर नहीं जाना है और दिनभर कोरोना वायरस की ही खबरें देखनी हैं इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ना स्वाभाविक है। लोगों को परेशान करने वालीं तीन वजहें हैं एक तो कोरोना वायरस से संक्रमित होने का डर, दूसरा नौकरी और कारोबार लेकर अनिश्चितता और तीसरा लॉकडाउन के कारण आया अकेलापन।”
स्ट्रेस बढ़ने का शरीर पर असर
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इन स्थितियों का असर यह होता है कि स्ट्रेस बढ़ने लगता है। सामान्य स्ट्रेस तो हमारे लिए अच्छा होता है, इससे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलता है लेकिन ज्यादा स्ट्रेस, डिस्ट्रेस बन जाता है यह तब होता है, जब हमें आगे कोई रास्ता नहीं दिखता। घबराहट होती है, ऊर्जाहीन महसूस होता है, फिलहाल महामारी को लेकर इतनी अनिश्चितता और उलझन है कि कब तक सब ठीक होगा, पता नहीं। ऐसे में सभी के तनाव में आने का खतरा बना हुआ है। इस तनाव का असर शरीर, दिमाग, भावनाओं और व्यवहार पर पड़ता है। हर किसी पर इसका अलग-अलग असर होता है।
शरीर पर असर – बार-बार सिरदर्द, रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, थकान, और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव।
भावनात्मक असर – चिंता, ग़ुस्सा, डर, चिड़चिड़पना, उदासी और उलझन हो सकती है।
दिमाग पर असर – बार-बार बुरे खयाल आना जैसे मेरी नौकरी चली गई तो क्या होगा, परिवार कैसा चलेगा, मुझे कोरोना वायरस हो गया, तो क्या करेंगे। सही और गलत समझ ना आना, ध्यान नहीं लगा पाना।
व्यवहार पर असर – ऐसे में लोग शराब, तंबाकू, सिगरेट का सेवन ज्यादा करने लगते हैं कोई ज्यादा टीवी देखने लगता है, कोई चीखने-चिल्लाने ज्यादा लगता है, तो कोई चुप्पी साध लेता है।
कैसे दूर होगा स्ट्रेस
मानसिक तनाव की स्थिति से बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है, वरना तनाव अंतहीन हो सकता है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक आप कुछ तरीकों से खुद को शांत रख सकते हैं ताकि आप स्वस्थ रहें-
-खुद को मानसिक रूप से मज़बूत करना जरूरी है आपको ध्यान रखना है कि सबकुछ फिर से ठीक होगा और पूरी दुनिया इस कोशिश में जुटी हुई है बस धैर्य के साथ इंतजार करें।
– अपने रिश्तों को मज़बूत करें छोटी-छोटी बातों का बुरा ना मानें एक-दूसरे से बातें करें और सदस्यों का ख्‍याल रखें निगेटिव बातों पर चर्चा कम करें।
– घर से बाहर तो नहीं निकल सकते लेकिन, छत पर, खिड़की पर, बालकनी या घर के बगीचे में आकर खड़े हों सूरज की रोशनी से भी हमें अच्छा महसूस होता है।
– अपनी दिनचर्या को बनाए रखें, इससे हमें एक उद्देश्य मिलता है और सामान्य महसूस होता है हमेशा की तरह समय पर सोना, जागना, खाना-पीना और व्यायाम करें।
– एक महत्वपूर्ण तरीका यह है कि इस समय का इस्तेमाल अपनी हॉबी पूरी करने में करें। आप वह मनपसंद काम करें जो समय न मिलने के कारण आप न कर पाए हों। इससे आपको बेहद खुशी मिलेगी जैसे कोई अधूरी इच्छा पूरी हो गई है।
– अपनी भावनाओं को ज़ाहिर करना अगर डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों के साथ शेयर करें, जिस बात का बुरा लगता है, उसे पहचानें और ज़ाहिर करें, लेकिन वह गुस्सा कहीं और न निकालें।
– भले ही आप परिवार के साथ घर पर रह रहें फिर भी अपने लिए कुछ समय ज़रूर निकालें। आप जो सोच रहे हैं उस पर विचार करें। अपने आप से भी सवाल पूछें। जितना हो, पॉजिटिव नतीजे पर पहुंचने की कोशिश करें।
– सबसे बड़ी बात, बुरे वक्त में भी अच्छे पक्षों पर गौर करना है, जैसे अभी महामारी है, लॉकडाउन है लेकिन इस बीच आपके पास अपने परिवार के साथ बिताने के लिए, अपनी हॉबी पूरी करने के लिए काफी वक्त है इस मौके पर भी ध्यान दें।
जरूरत से ज्यादा खबरें नहीं
आजकल टीवी और सोशल मीडिया पर चारों तरफ़ कोरोना वायरस से जुड़ी खबरें आ रही हैं। हर छोटी-बड़ी, सही-गलत ख़बर लोगों तक पहुंच रही हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक़ इससे भी लोगों की परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि वह एक ही तरह की बातें सुन, देख व पढ़ रहे हैं और फिर सोच भी वही रहे हैं।
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि इसके लिए ज़रूरी है कि लोग उतनी ही खबरें देखें और पढ़ें जितना जरूरी है उन्हें समझना होगा कि एक ही चीज़ बार-बार देखने से उनके दिमाग में वही चलता रहेगा। इसलिए दिनभर का एक समय तय करें और उसी वक्त न्यूज चैनल देखें।
मनोचिकित्सकों की सलाह है कि इस वक्त अपना ध्यान बंटाना जरूरी है इसके लिए खुद को दूसरे कामों में व्यस्त रखें। दोस्तों और परिजनों से बातचीत करते रहें या अपने मनपसंद काम में ध्यान लगाएं। कुछ लिखना भी इस दौरान सुकून दे सकता है।

शेयर करें

मुख्य समाचार

मौजूदा भारतीय हॉकी टीम में विश्वस्तरीय रक्षापंक्ति और ड्रैग फ्लिकर: रघुनाथ

बेंगलुरू : पूर्व हॉकी खिलाड़ी वीआर रघुनाथ का मानना है कि मौजूदा भारतीय टीम के पास विश्वस्तरीय रक्षापंक्ति और स्तरीय ड्रैग फ्लिकर हैं और टीम आगे पढ़ें »

आईसीसी बोर्ड की बैठक : बीसीसीआई, सीए में होगी टी20 विश्व कप बदलने पर चर्चा

नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) और क्रिकेट आस्ट्रेलिया (सीए) के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की शुक्रवार को होने वाली बोर्ड बैठक के आगे पढ़ें »

ऊपर