कोरोना वायरस : चेहरे को छूने से स्वयं को ऐसे बचाएं

डॉक्टर बार-बार ये चेतावनी दे रहे हैं कि कोरोना वायरस से बचना है तो अपना चेहरा ना छूएं। लेकिन हम अनजाने में अपने चेहरा, आँख, नाक, मुंह सब जगह हाथ लगाते रहते हैं। ये सबके साथ होता है। लेकिन ऐसा होता क्यों हैं? क्यों हमारे हाथ बार-बार अपने चेहरे पर जाते हैं और अचानक ये आदत छूट जाए, क्या ऐसा हो सकता है?
आइये इस बारे में जानें कि मनोवैज्ञानिकों का क्या कहना है –
हम अपना चेहरा क्यों छूते हैं ?
हम ऐसा जानबूझकर नहीं करते हैं। ये हमारे डीएनए का हिस्सा है। ये अपने आप होता है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि जब भ्रूण गर्भ में होता है, तब भी वो अपने चेहरे को छूता है। इसलिए बार-बार ख़ुद को याद दिलाते रहें कि आपको अपना चेहरा नहीं छूना है। आप ख़ुद से कहिए कि अगर मैं अपना चेहरा छूऊंगा या छूऊंगी तो बीमार होने की आशंका रहेगी। हालांकि आप ख़ुद से कुछ ऐसा करने के लिए कह रहे हैं, जो आपके लिए बिल्कुल स्वभाविक नहीं है।
दरअसल, जब भी हम अपना चेहरा छूते हैं, तब हम खुद को सुकून देने, आराम पहुंचाने के लिए ऐसा कर रहे होते हैं
जब हम अपने चेहरे के किसी हिस्से को छूते हैं तो असल में हम अपने कुछ प्रेशर प्वाइंट्स को एक्टिव कर रहे होते हैं। इससे हमारा नर्वस सिस्टम भी सक्रिय हो जाता है। इससे हम अंदर से ख़ुद को शांत कर पाते हैं।
सिर्फ इंसान ही नहीं, कुत्ते-बिल्ली और दूसरे जानवर भी ऐसा करते हैं। अगर घर के छोटे बच्चों की बात करें, तो वो हर चीज़ अपने मां-बाप से सीखते हैं या उनकी नक़ल करते हैं। वो देखते हैं कि उनके मां-बाप जब हैरान होते हैं तो अपना चेहरा छूते हैं। ख़ुशी में भी अपना चेहरा छूते हैं। जब परेशान होते हैं तो अपना चेहरा छूते हैं। बच्चे भी फिर ऐसा ही करते हैं। लेकिन इस वक़्त ये बेहद ज़रूरी है कि कोरोना से बचने के लिए हम इस आदत को बदलें।
लेकिन फिर भी अनजाने में हमारा हाथ बार-बार उस जगह जाता है, क्योंकि हमें लगता है कि हम चेहरा छूते रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे।
चेहरा छूने की आदत कैसे बदलें?
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस आदत को पूरी तरह बदलना नामुमकिन है। लेकिन अगर आप उन चीज़ों को बदलें, जिसकी वजह से आप बार-बार ऐसा करते हैं, तो ये कम हो सकता है। जैसे अगर आप कॉन्टेक्ट लेंस पहनते हैं तो उसकी जगह चश्मा पहन लें। कम मेकअप लगाएं ताकि बार-बार टच-अप ना करना पड़े। अपने हाथों को इस्तेमाल करने की आदतों को बदलें। अगर आप हाथों को ऐसे फैलाकर बात करते हैं तो हो सकता है आप अनजाने में अपने चेहरे को बीच-बीच में छूने लगें। उसके बजाय आप हाथों को ऐसे बांधकर गोदी में रख लें।
तब अगर आपका हाथ अनजाने में अपने चेहरे की तरफ़ जाएगा, तो आपका ध्यान ज़्यादा इस तरफ़ जाएगा कि आप क्या कर रहे हैं। इससे आप अपने आप को रोक लेंगे।
हम क्या कर सकते हैं ?
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और बिहेवियरल साइंस के विशेषज्ञ माइकल हॉलस्वर्थ मानते हैं कि ये कहना आसान है कि ऐसा न किया जाए लेकिन असल में इस सलाह को अमल में लाना मुश्किल है।
हॉलस्वर्थ के अनुसार “लोगों को कुछ ऐसा करने के लिए कहना जो अनजाने में होता है एक बड़ी समस्या है, इससे ज़्यादा आसान यह है कि लोग अपने हाथों को बार-बार धोते रहें, ताकि वे अपने चेहरे को कम बार छू सकें। अगर आप किसी से वो काम करने को कहेंगे जो कि वो अंजाने में करता हो तो ऐसी सलाह देने से कोई फ़ायदा नहीं होगा।”
हालांकि, हालस्वर्थ मानते हैं कि कुछ चीज़ें हैं जो आपकी मदद कर सकती हैं। इनमें से एक यह है कि हमें यह पता हो कि हम अपने चेहरों को कितनी बार छूते हैं।
“जब यह (चेहरा छूना) खुजली मचाने की ज़रूरत जैसी शारीरिक मांग बन जाए तो हम सजग रहकर अपने बचाव में क़दम उठा सकते हैं, जैसे कि हम अपने उल्टे हाथ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे जोख़िम कम होता है चाहें ये समस्या का समाधान हो या न हो।”
हाथ धोना सबसे बेहतर विकल्प
आख़िर में सही ढंग से हाथ धोने से अच्छा विकल्प कोई नहीं होता है और इसके साथ-साथ सजगता भी ज़रूरी है। n

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