कामकाजी महिला को जरूरत है सहयोग की

आज जब सीमा ऑफिस आयी तो मैंने देखा उसका चेहरा उतरा हुआ था, आंखें सूजी हुई थी। ऐसा लग रहा था मानो वह किसी से झगड़ कर और रो कर आई है। मैंने उससे उसकी इस हालत का कारण पूछा तो वो मेरी सहानुभूति पाते ही फफक-फफक कर रो पड़ी और बोली,
‘क्या बताऊं, मेरे पति चाहते हैं कि नौकरी भी करूं और घर पर भी उनकी गुलाम बनकर उनके पीछे फिरती रहूं। वो मेरा जरा सा भी हाथ नहीं बंटाते। जब मैं नौकरी छोड़ने की बात करती हूं तो लड़-झगड़कर मुझे ऐसा भी नहीं करने देते। मेरा तो अपना कुछ अस्तित्व ही नहीं रह गया है।’
वैसे देखा जाये तो यह समस्या सिर्फ सीमा की ही नहीं बल्कि हर कामकाजी स्त्री के घर की समस्या है।
स्त्री को नौकरी करवाकर पुरुष अपनी आजाद मानसिकता को दर्शाना तो चाहते हैं परंतु साथ ही वे इस बात को ही तरह स्वीकार नहीं कर पाते कि औरत उनके बराबर आये।
पुरुष प्रधान इस समाज में नारी को सिर्फ उपभोग की वस्तु समझा जाता है। पुरुष औरत की विवशताओं का लाभ उठाने से नहीं चूकता परंतु हर जगह ऐसा नहीं है। कई स्थान पर इसके अपवाद भी देखने को मिलते हैं।
रवि ने अपनी ठेठ अनपढ़ गंवार पत्नी को पढ़ाया-लिखाया, इस काबिल बनाया कि वह समाज में सम्मान की जिंदगी जी सके, उसे ऊंचे ओहदे पर पहुंचाया परंतु उनकी पत्नी में उच्च पद प्राप्त करते ही ऐसा घमण्ड आया कि वह अपने पति को ही चपरासी समझने की भूल कर बैठी। धीरे-धीरे उनमें वैचारिक अलगाव बढ़ता गया और नतीजा तलाक तक जा पहुंचा।
ऐसा नहीं है कि स्त्रियां काम न करें। यह तो समय की मांग है और स्वस्थ मानसिकता के लिये परस्पर सामंजस्य की आवश्यकता है। पति-पत्नी दोनों ही एक दूसरे की व परिवार की जरूरतों को समझें, एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र करें, तभी सुखी दाम्पत्य जीवन मुमकिन हो सकता है।
पति को चाहिये कि वह यह न भूलें कि आप ही की तरह आपकी पत्नी भी दफ्तर की उधेड़बुन में बुरी तरह थक जाती है। उसे भी मदद की आवश्यकता होती है अत: पति घर में पूर्ण सहयोग करने का प्रयास करें।
साथ ही स्त्री को भी नारीत्व की गरिमा नहीं भूलनी चाहिए। नारी के लिये सबसे महत्त्वपूर्ण उसका अपना घर-परिवार होता है। अपनी उस रंगीली दुनिया की उपेक्षा कर, उसमें आग लगाकर स्त्री कभी मानसिक सुख नहीं पा सकती।
अत: स्त्री व पुरुष दोनों को ही अपने अधिकारों का उपयोग करना चाहिए परंतु उसके लिये वे अपने दायित्व भी न भूलें।
ध्यान रहे कि पति-पत्नी गाड़ी के दो पहिए हैं तथा सुखी दांपत्य जीवन का आधार हैं। दोनों ही एक दूसरे की आवश्यकताओं व विवशताओं को समझेंगे, तभी सुखी जीवन जी सकेंगे। (उर्वशी) अंजलि गंगल

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