कर्नाटक मुद्दे पर लोकसभा में हुई नारेबाजी, कांग्रेस,डीएमके व एनसीपी ने किया वॉकआउट

नयी दिल्ली : कर्नाटक में चल रही उठापटक को लेकर मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और जनता दल सेकुलर (जेडीएस) गठबंधन के विधायकों के इस्तीफे और सरकार गिराने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कहा वह ‘शिकार’ की राजनीति करके लोकतंत्र को नष्ट कर रही है। वहीं केंद्र सरकार ने इसे कांग्रेस का अंदरूनी मामला बताया है। इसके बाद सदन में विपक्षी दलों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और सत्ता पक्ष के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा से वॉकआउट किया।

सत्तापक्ष ने आरोपों को किया खारिज

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कर्नाटक मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया। भाजपा ने कांग्रेस द्वारा राज्य में सरकार को अस्थिर करने की ‌कोशिश किए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कर्नाटक में जो भी हो रहा है, वह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है। वह अपने घर को संभाल नहीं पा रही है और यहां उसके सदस्य सदन को बाधित कर रहे हैं।

सदन में लगाए सरकार विरोधी नारे

इससे पहले लोकसभा में प्रश्नकाल के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के बाद जैसे ही शून्यकाल आरंभ करने की घोषणा की, कांग्रेस के सदस्य खड़े हो गये और कर्नाटक में राजनीतिक उठापटक का विषय उठाने लगे। लेकिन अध्यक्ष ने यह कहते हुए इसकी इजाजत नहीं दी कि कांग्रेस के सदस्य कल इस विषय को उठा चुके हैं और एक विषय दो बार नहीं उठाया जा सकता है। स्पीकर के इस जवाब से इससे कांग्रेस के सदस्य उत्तेजित हो गये और नारेबाजी करने लगे। उन्होंने ‘वी वांट जस्टिस’, ‘लोकतंत्र को कुचलना बंद करो’, ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘मोदी सरकार हाय हाय’ के नारे लगाने शुरू कर दिये।

राहुल गांधी के आह्वान पर शुरू हुआ इस्तीफे का दौर

सदन में चल रही नारेबाजी के बीच पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी होंठ हिलाते दिखाई दिये। इस बीच अध्यक्ष के नाम पुकारने पर विभिन्न सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्र के मुद्दे उठाये। बाद में कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गये और नारेबाजी जारी रखी। तभी संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने नियम पुस्तिका का हवाला देते हुए कहा कि नियम 197 के तहत स्पष्ट किया गया है कि एक विषय को दो बार नहीं उठाया जा सकता है। कर्नाटक के बारे में कांग्रेस के नेता भाजपा पर जो भी आरोप लगा रहे हैं, वह सरासर गलत है। वहां सत्तारूढ़ दल के विधायकों के इस्तीफे का सिलसिला राहुल गांधी के आह्वान पर शुरू हुआ है।

सदन की गरिमा को वैश्विक स्तर का बनाना है

लोकसभा स्पीकर बिरला ने भी विपक्षी सदस्यों को कड़े शब्दों में कहा कि वे सदन में कागज नहीं लायें अन्यथा उनके विरुद्ध कार्यवाही करेंगे। वह अंतिम चेतावनी दे रहे हैं। इसके बावजूद हंगामा नहीं थमा। इस पर बिरला ने सभी विपक्षी सदस्यों से अपनी सीट पर जाने की अपील करते हुए कहा कि विपक्ष ने उन्हें कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया था जिसे उन्होंने अस्वीकृत किया है, लेकिन उन्होंने हमेशा ही हर सदस्य को शून्यकाल में बारी के बिना भी मुद्दा उठाने का मौका दिया है और देते रहेंगे। सदन की गरिमा को वैश्विक स्तर का बनाना है। इसलिए नारेबाजी और तख्तियों को बंद करने की आवश्यकता है।

सदन को बाधित करना भी लोकतंत्र का एक औजार

वहीं कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि वह अध्यक्ष की पीड़ा को समझते हैं, लेकिन सदन की उत्पादकता बढ़ी है तो उसमें कांग्रेस के सदस्यों का सहयोग भी है। विपक्ष विवाद करता है और सरकार निर्णय लेती है। हम अपना कर्तव्य निभा रहे हैं, सरकार अपना फर्ज निभाये। उन्होंने कहा कि पिछले सदन में सरकार के कद्दावर नेता अरुण जेटली ने कहा था कि सदन को बाधित करना भी लोकतंत्र का एक औजार है।

बता दें कि चौधरी ने कर्नाटक मामले पर पहले भी भाजपा पर आरोप लगाए हैं। जिसके जवाब में सदन के उपनेता और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि कर्नाटक में जो कुछ भी हो रहा है, वह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है। साथ ही यह भी कहा कि वे अपने घर को संभाल नहीं पा रहे हैं और सदन को बाधित कर रहे हैं। इसे कदापि स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इससे असंतुष्ट चौधरी के नेतृत्व में विपक्षी कांग्रेस, डीएमके और एनसीपी के सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए।

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