एसिडिटी है या पेट का कैंसर? कैसे करें पता…

नई दिल्ली : बदलते समय के साथ हमारे खान-पान और दिनचर्या में काफी बदलाव आया है। इसका सबसे अधिक प्रभाव हमारे शरीर पर पड़ता है। इसकी वजह से हमारा शरीर कई तरह की बीमारियों की जकड़ में आ रहा है। ऐसी ही बीमारियों में से आजकल बहुत ही आम बीमारी है, पेट का कैंसर। इसे गैस्ट्रिक कैंसर भी कहते हैं।

भारत में पुरुषों में होने वाला ये पांचवा सबसे कॉमन कैंसर हैं। औरतों में ये सातवें नंबर पर आता है। डराने वाली बात यह है कि ये दुनिया का दूसरा सबसे जानलेवा कैंसर है, जो पेट में होता है। इस कैंसर के साथ दिक्कत ये है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत ही आम बिल्कुल एसिडिटी जैसे होते हैं। जैसे पेट में दर्द, सीने में जलन, खट्टी डकारें आना आदि। इसलिए शुरुआती दिनों में बिना टेस्ट कराए यह आसानी से पकड़ में नहीं आता है।

क्या है पेट का कैंसर और इसके कारण?

हम जो खाना खाते हैं वो फूड पाइप के द्वारा पेट में जमा होता है। वहां हजम होना शुरू होता है। हमारे डाइजेशन सिस्टम में पेट छोटी आंत से पहले होता है। कई बार पेट में एक ऐसी गांठ बन जाती है जो आसपास के टिश्यू को डिस्ट्रॉय करती है। इन टिश्यूज में से छोटे-छोटे सेल्स टूटकर बाकी शरीर में फैलते हैं। इस तरह के गांठ को स्टमक यानी पेट का कैंसर कहते हैं।

पेट के कैंसर होने के कई कारण हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये जेनेटिक अथवा खानपान व रहन-सहन में बदलाव की वजह से हो सकता है। अगर हम बहुत नमक वाला या स्मोक्ड खाना खाते हैं तो एसिडिटी होती है। एसिड रिफ्लक्स होता है। ऐसे लोगों में स्टमक कैंसर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। वहीं, स्मोकिंग, शराब के सेवन से भी पेट के कैंसर होने का रिस्क रहता है।

कैसे पहचाने, क्या हैं लक्षण?

पेट के कैंसर के लक्षण कई बार माइल्ड होते हैं और पता नहीं चलते। लंबे समय तक गैस बनना, खाना मुंह की तरफ़ ऊपर आना, खट्टी डकारें आना, पेट में ऊपर की तरफ दर्द। अंदर अगर ब्लीडिंग होने लगती है तो उल्टी में खून आता है। मल एकदम काले रंग का होता है। यानी अगर एसिडिटी के लक्षण लंबे समय तक दिखें तो डॉक्टर से कंस्लट करना जरूरी है।

क्या है इलाज?

डॉक्टरों से ‌मिली जानकारी के अनुसार, ट्रीटमेंट में सबसे पहले ये देखना होता है कि पेट का कितना हिस्सा इफ़ेक्टेड है। इसके लिए सबसे पहले एंडोस्कोपी करनी पड़ती है। जांच की जाती है कि बीमारी पेट के किस हिस्से में है और कितने हिस्से में है? अगर ज़्यादा एरिया है तो ऑपरेट करके निकालना पड़ता है। अगर कम हिस्से में होता है ट्यूमर को एक मार्जिन के साथ करीब पांच सेंटीमीटर आगे और पीछे निकाल दिया जाता है।

आसपास कुछ छोटी गांठे होती हैं जिन्हें लिम्फ नोड्स कहते हैं। इस कैंसर के पेट से लेकर लिम्फ नोड्स तक फैलने की गुंजाइश होती है। ये गांठे कई बार बड़े तो कई बार छोटी साइ की होती है। दोनों ही केस में पेट के आसपास लिम्फ नोड्स को निकाला जाता है। कई बार ट्यूमर अगर ज्यादा होता है और एक बार में नहीं निकल सकता है तो पहले कीमोथरैपी दी जाती है, ताकि उसके साइज को कम किया जा सके। साइज कम होने के बाद उसे ऑपरेशन से निकाल देते हैं। अगर शुरू में बीमारी ऑपरेशन लायक है तो पहले ऑपरेशन किया जाता है। रिपोर्ट के आधार पर ऑपरेशन के बाद कीमोथरैपी और रेडियोथरैपी दी जाती है।

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