इस बार हजार करोड़ के नुकसान की मार झेल सकते हैं दुर्गापूजा से जुड़े उद्योग

सबिता राय, कोलकाता : कोरोना का साया बंगाल के सबसे बड़े पूजा इंडस्ट्री यानी दुर्गापूजा पर भी पड़ता नजर आ रहा है। पूजा जुड़े इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के अनुसार कोराना के कारण उत्पन्न स्थिति से विभिन्न क्षेत्रों में नुकसान हजार करोड़ या उससे अधिक तक जा सकता है। हर हाल इस महीने यानी अप्रैल तक पूजा की तैयारियां 40% तक हो जाती है। चाहे वह मूर्ति निर्माण, कपड़े जुड़े उद्योग हो, पर्यटन या फिर अन्य क्षेत्र मगर इस बार लॉकडाउन के कारण सभी शून्य की स्थिति पर खड़े हैं। कोरोना ने सभी के हाथ बांध दिये है और कब तक हाथ खुलेगे यह कोई भी नहीं कह सकता है।
मार्केट और दुकानों में झूल रहे है ताले, रमजान में खरीदारी पर असर
एस्पलानेड, गरियाहाट, श्यामबाजार, हाथी बागान, न्यू मार्केट जो कोलकाता के बड़े शॉपिंग हब के रूप में जाने जाते हैं। यहां अमूमन ही खरीदारी की जबरदस्त भीड़ होती है। छोटे से लेकर बड़े कारोबाड़ी का कारोबार दुर्गापूजा के समय बम बम करता है। रमजान भी शुरू हो गया है। पूरे महीने करोड़ों का व्यवसाय हाेता है। यहां के व्यवसायियों का कहना है कि दुर्गापूजा के लिए अभी तक तो 40 प्रतिशत मालों का लाने का काम भी पूरा हो गया रहता और रमजान की भी खरीदारी शुरू हो जाती है मगर अभी मार्केट में सन्नाटा पसरा है।
कुम्हार टोली में छाया सन्नाटा, मूर्ति बनना बंद
मूर्ति निर्माण में कुम्हार टोली सबसे प्रसिद्ध है। हर साल इस समय में दुर्गापूजा की मूर्तियों का जबरदस्त ऑडर्र आना शुरू हो जाता है। यहां लगभग 300 दुकानें है जो मूर्ति के कारोबार से जुड़े है मगर इस वर्ष कुम्हार टोली में सन्नाटा पसरा है। दुर्गा की प्रतिमा यहां से विदेशों में भी जाती है। महिला कलाकार चाइना पाल ने बताया कि रसिया, जर्मन व अन्य देशों में हर साल 40 – 50 मूर्तियां भेजी जाती है। एक अन्य कलाकार बाबू पाल ने कहा कि इस साल जो स्थिति है उससे लगता है कि शायद ही इस बार विदेश तक मूर्तियां जाए। अभी घरों में होने वाली दुर्गापूजा की मूर्तियों के ऑर्डर एकाध मिल रहे है मगर हमलोग उसे भी अभी स्वीकार नहीं कर रहे है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद की स्थिति को देखने के बाद आगे जो होगा वही
देश- विदेशों से आते हैं पर्यटक
बंगाल यात्रा में विदेशी पयर्टक काफी रुचि दिखाते हैं। खासकर दुर्गापूजा में विदेशी पयर्टक की संख्या काफी बढ़ जाती है। खासकर यूरोप तथा पूर्वी देशों से ज्यादातर पर्यटक शामिल होते हैं। एक प्रमुख टूर ऑपरेटर के मुताबिक पांच दिनों के दुर्गापूजा के दौरान कोलकाता आने में पयटकों के बीच रुचि काफी अधिक होती है। मगर जो स्थिति है अभी उससे लग रहा है कि इस बार विदेशी पर्यटकाें की संख्या पूजा में कम हो सकती है। वहीं देश के विभिन्न राज्यों से भी लोग बंगाल पूजा को देखने आते हैं। वैसे तो सितंबर के आखिरी दिनों तक तो टूरिस्टों के आने का पीक टाइम होता है मगर इसकी तैयारी तो कई महीने पहले से होने लगती है। अभी की स्थिति को देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि इस कितने लोग आएंगे यह कह पाना मुश्किल है।
महानगर में 10 से 50 लाख तक की पूजा
-महानगर में कुल दुर्गापूजा होती हैं – करीब 2200
– करीब 50 पूजा पंडालों का बजट – करीब 50 लाख तक
– करीब 200 पूजा का बजट – 20 – 50 लाख तक
– करीब 300 पूजा का बजट – 10 – 20 लाख
– 1500 से अधिक पूजा का बजट – लगभग 10 लाख के नीचे यह जानकारी – शाश्वत बसु, फोरम फॉर दुर्गोत्सव, जनरल सेक्रेटरी
क्या कहना है पर्यटन मंत्री का
दुर्गापूजा और इससे आसपास के पर्यटक स्थलों पर एक अनुमानित आकलन के आधार पर इस वर्ष 2 लाख पर्यटन आने की संभावन थी। पहाड़, डुआर्स में आने वाले पर्यटकों को भारी निराशा हुई और काफी संख्या में बुकिंग को रद्द किया गया। होलट, रिसार्ट के साथ साथ वाहनों के चालक भी उनकी यात्रा को रिशेड्यूल करने की सलाह दे रहे हैं।- गौतम देब, पर्यटन मंत्री

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