आंवला खाइये, जीवन भर तंदुरुस्त रहिये

आंवला जराव्याधिनाशक एवं त्रिदोषहर, होने के कारण शरीर को युवा और बलशाली बनाए रखने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इसलिए इसे आयुर्वेद में ‘अमृतफल’ की उपमा दी गई है। हिन्दी, मराठी तथा गुजराती में इसे ‘आंवला’, संस्कृत तथा बंगला में ‘आमलकी’, मलयालम में ‘नोल्ल्किी’, तमिल में ‘लेल्लिकाई’ और तेलगू में ‘उशीरिकाई’ कहते हैं।
विटामिन ‘सी’ का सम्राट आंवला
इसका पेड़ मध्यम आकार का होता है जो सभी प्रदेशों में पाया जाता है। बसन्त ऋतु में इसमें फूल आकर, जाड़ों में इसका फल पक जाता है। यह स्वाद में कसैला, खट्टा, पकने पर मीठा, हल्का, रुखा और शीतल गुण वाला होता है। इसमें टमाटर, अनानास और केले से भी अधिक विटामन ‘सी’ पाया जाता है जो लगभग 68 प्रतिशत होता है इसलिए इसे विटामिन ‘सी’ का सम्राट कहा जाता है।
‘त्रिफला’ का यह एक देव है
ऋषि च्यवन ने इसके योग से पुन: अपने यौवन को प्राप्त किया था जिससे उस योग को ‘च्वयनप्राश’ के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद के त्रिदेव ‘त्रिफला’ का यह एक देव है जो जलन या दाह, नेत्ररोग, केशरोग, कामेन्द्रिय रोग, स्नायु रोग, मस्तिष्क रोग, अरुचि अजीर्ण, यकृत रोग, रक्तविकार, श्वास, खांसी आदि रोगों का संहार करता है। तो आइये निम्न छोटे से प्रयोगों से हम इसके गुणों से लाभ लें :
जिनका आमाशय बिगड़ा हुआ है तो समझो कि सब कुछ बिगड़ गया है क्योंकि इससे ही खाया पिया पचता है और फिर हाड़ मांस, रक्त बनता है। इसे ठीक करने के लिए भोजन के बाद एक चम्मच आंवले का चूर्ण पानी से लेंगे तो कुछ दिनों में ही चमत्कार स्वयं ही देख लेंगे।
अजीर्ण से जो परेशान हो चुके हैं, वे आंवले का चूर्ण एक चम्मच शहद या घी में चाट कर इससे निजात पा सकते हैं और अपनी जठराग्नि बढ़ाकर भोजन का आनंद ले सकते हैं।
जिनको खुजली होती है, उसकी पीड़ा कोई भुक्तभोगी ही जान सकता हैं। कहीं भी कैसी भी खुजली हो, चमेली का तेल एक छोटी शीशी में लेकर उसमें आंवले का चूर्ण मिलाकर मलने से वह दूर होकर शांत हो जाती है।
जिनको चाय की ज्यादा आदत पड़ चुकी हो और वे इसे मजबूरन कम नहीं कर सकते, वे तन्दुरूस्ती की चाय पीना शुरू कर सकते हैं जो उन्हें चाय का मजा तो देगी ही लेकिन उसके नुकसान नहीं। सूखे आंवलों को चायपत्ती की जगह उबालकर, दूध, चीनी डाल कर चाय जैसी बनाकर पीएं तो मुखड़ा सुन्दर-सलोना, शरीर में स्फूर्ति के साथ तंदुरुस्ती भी प्राप्त होगी। आजमाकर देख लें।
किसी को जब बदन में जान नहीं है सा लगे, उठते हुए आंखों के आगे अंधेरा घिर आए, रक्त निचुड़ सा गया हो तब आंवले के चूर्ण को तेल में छानकर रख लें। एक चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर चाटें तो एक माह में ही ‘कायाकल्प’ होता हुआ खुद देख लें।
इसके अलावा कोई भी नियम पूर्वक आंवले का चूर्ण 5 ग्राम रोज ठण्डे पानी से सेवन करे तो दिमाग तेज होगा, नेत्र ज्योति बढ़ेगी, श्वास के रोग दूर होंगे, रक्त शुद्ध और उसका संचार ठीक होकर दिल मजबूत, जिगर तिल्ली का सुधार हो कर पाचन शक्ति सही होती है। आंवला को गुणों की खान कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। इसके गुणों के कारण ही आयुर्वेद ने इसे ‘रसायन’ माना है।

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