अयोध्या मामला : शीर्ष न्यायालय ने ‌निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किया, अखाड़े ने कहा अफसोस नहीं

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नई ‌दिल्ली : शीर्ष न्यायालय का अयोध्या मामले में फैसला आ गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया है। अयोध्या मामले में निर्मोही अखाड़े ने शीर्ष न्यायालय को अक्टूबर में दस्तावेज सौंपे थे। निर्मोही अखाड़े ने लिखित दलील में कहा था कि विवादित भूमि का आंतरिक और बाहरी अहाता भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में मान्य है। हम रामलला के सेवायत हैं और ये हमारे अधिकार में सदियों से रहा है।

निर्मोही अखाड़े की पहली अपील

गौरतबल है कि अयोध्या विवाद की शुरुआत 23 दिसंबर 1949 को हुई थी, जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों का दावा था कि किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं। यूपी सरकार ने उस समय मूर्तियां हटाने का आदेश दिया, लेकिन हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई गई। इसके बाद सरकार ने इसे विवादित स्थल मानकर मस्जिद पर ताला लगवा दिया।

साल 1950 में दूसरा और 1959 में तीसरी अर्जी दाखिल की गई

बता दें कि अयोध्या मामले में साल 1950 में फैजाबाद सिविल कोर्ट में दो अर्जी दाखिल की गई। इसमें एक में राम लला की पूजा की इजाजत और दूसरे में विवादित ढांचे में भगवान राम की मूर्ति रखे रहने की इजाजत मांगी गई। इसके बाद 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने तीसरी अर्जी दाखिल की, जिसमें निर्मोही अखाड़ा चाहता है कि उसे राम जन्मभूमि का प्रबंधन और पूजन का अधिकार मिले। इसके बाद साल 1961 में यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अर्जी दाखिल कर विवादित जगह के पजेशन और मूर्तियां हटाने की मांग की। इसके बाद से यह मामला अदालत में उलझा हुआ था।

दावा खारिज होने का अफसोस नहीं : निर्मोही अखाड़ा

वहीं शीर्ष न्यायालय के फैसले पर निर्मोही अखाड़े ने कहा है कि अयोध्या में विवादित जमीन पर मालिकाना हक का अपना दावा खारिज होने का उसे कोई अफसोस नहीं है। निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ पंच महंत धर्मदास ने कहा कि विवादित स्थल पर अखाड़े का दावा खारिज होने का कोई अफसोस नहीं है, क्योंकि वह भी रामलला का ही पक्ष ले रहा था। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने रामलला के पक्ष को मजबूत माना है। इससे निर्मोही अखाड़े का मकसद पूरा हुआ है।

14 अखाड़ों में से एक है

बता दें कि निर्मोही अखाड़ा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त 14 अखाड़ों में से एक है। इसका संबंध वैष्णव संप्रदाय से है। इस अखाड़े ने 1959 में बाबरी मस्जिद की विवादित भूमि पर अपना मालिकाना हक जताते हुए एक मुकदमा दायर किया किया था, तभी से यह चर्चा में आया।

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