अमृत पान है उषा पान

उषा अर्थात प्रात:काल उठने के बाद जल पीने को उषापान कहते हैं। आयुर्वेद में उषापान को अमृतपान कहा गया है। रोगों को दूर करने में यह सरल, नि:शुल्क व सर्वसुलभ उपचार है। उषा पान को जल चिकित्सा या वाटर थेरेपी भी कहते हैं। वर्तमान चिकित्सक भी आयुर्वेद के इस प्राचीन उपचार की महत्ता स्वीकार करते हैं।
उषापान पर वैज्ञानिक शोध
जापान की संस्था ‘द सिकनेस एसोसिएशन’ ने अपने शोध अध्ययन में निम्न निष्कर्ष निकाला है।
रात में नींद के समय लगभग 6 घंटे तक हर व्यक्ति के शरीर में कम हलचल होती है। इस बीच पेट द्वारा भोजन पचाकर उसका रस सारे शरीर में पहुंचाने का काम बराबर चलता रहता है। इस प्रक्रिया के साथ शरीर में नये कोष बनाने तथा पुराने कोषों को मल के रूप में विसर्जित करने का चयापचय का क्रम चलता रहता है। रात में शरीर की हलचल तथा शरीर में पानी के प्रवाह की कमी से जगह-जगह शरीर में विषैले तत्व एकत्रित हो जाते हैं। प्रात: जागते ही शरीर में पर्याप्त मात्रा में एक साथ पानी पहुंचने से शरीर के आंतरिक अंगों की धुलाई जैसी क्रिया होती है जिससे सहज ही शरीर में विजातीय पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। यदि ये विजातीय पदार्थ या विष शरीर से बाहर नहीं निकल पाते तो अनेक रोगों के कारण बन जाते हैं। ये विषाक्त पदार्थ शरीर में पथरी या गांठ के रूप में बन जाते हैं। उषापान से ऐसी बीमारियों को पनपने का अवसर ही नहीं मिलता।
उषापान के प्रयोग, परीक्षण एवं शोध से निम्न परिणाम निकले हैं:-
निम्न रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
• सिर दर्द, रक्तचाप, एनीमिया संधिवात, मोटापा, स्नायुरोग, साइटिका, दिल की धड़कन, बेहोशी।
• कफ, खांसी, दमा, ब्रोंकाइटिस, टी. बी.।
•मैनेजाइटिस, लिवर संबंधी रोग, स्वप्नदोष।
• हाइपरएसिडिटी, अम्लपित्त गैस संबंधी रोग व तकलीफ।
• पेचिस, गुर्दे की बीमारी, कब्जियत, डायबिटीज।
• नाक और गले संबंधी बीमारियां।
• स्त्रियों की अनियमित माहवारी प्रदर, आदि समस्त रोगों की जड़ कब्ज है। उषापान कब्ज का अचूक उपचार है।
उषापान के नियम
• सवेरे उषाकाल में ही यह प्रयोग करें। दिन में जल पीने से उतने लाभ नहीं होते।
• मंजन या ब्रश करने से पूर्व बासी मुंह कुल्ला करके जल पीएं।
• 60 किलोग्राम भार के व्यक्ति 1 लीटर पानी प्रात: काल पीएं। आयुर्वेद में 8 अंजलि जल पीने को कहा गया है।
• पानी बैठकर पीएं, खड़े होकर नहीं। रात में तांबे के बरतन में रखा पानी सुबह पीएं तो अधिक लाभ होता है।
• जिनके शरीर में गर्मी हो, जलन रहती हो, वे रात्रि का रखा सादा पानी पीएं।
• उषापान प्रारंभ करने के 10-15 दिन तक पेशाब ज्यादा व जोर से लगेगा किंतु बाद में ठीक हो जायेगा।
• जिनको सर्दी अधिक लगती है, पाचन अग्नि मंद हो, कमजोरी हो, वे अधिक सर्दियों में हल्का गर्म पानी पीएं।
• पानी पीकर 10 मिनट पेट पर हाथ फेरते हुए खुली हवा में टहलें। यह क्रिया कब्ज के मरीजों के लिए विशेष उपयोगी है।
इन पर भी ध्यान दें:-
• तले भुने पदार्थ, मिर्च मसाला परहेज करें
• भूख से कम खायें व चबा चबा कर खायें।
• भोजन के साथ पानी न पीएं। भोजन के डेढ़ घंटे बाद पानी पीएं।
•भोजनोपरांत तत्काल जल पीना नुकसानदायक है। (स्वा.) nमहेन्द्र सिंह

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