अब बिहार में वाहनों को हर छह महीने में लेना होगा प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र

पटना : जलवायु परिवर्तन के आसन्न खतरों से सचेत एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध बिहार सरकार ने राज्य में वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र की वैधता अवधि एक साल से घटाकर छह माह कर दी है।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव डॉ. दीपक प्रसाद ने मंगलवार को यहां बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी है। डॉ. प्रसाद ने बताया कि राज्य में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर यह पाया गया कि वाहनों के परिचालन के कारण राज्य की परिवेशीय वायु की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जिसे सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से कम किया जाना आवश्यक है। इसके लिए बिहार मोटरवाहन नियमावली, 1982 के नियम 163 (ख), 163 (घ), 163 (ड़) एवं 163 (छ) में निम्न संशोधन एवं प्रतिस्थापन के साथ बिहार मोटरवाहन (संशोधन) नियमावली, 2019 के गठन को मंजूरी दी गयी है।

प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र की वैद्यता अवधि को एक वर्ष से घटाकर छह माह किया गया 

प्रधान सचिव ने बताया कि संशोधन नियमावली के तहत प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र की वैद्यता अवधि को एक वर्ष से घटाकर छह माह कर दिया गया है यानी अब हर छह महीने पर वाहनों के प्रदूषण स्तर की जांच करवाकर प्रमाण पत्र लेना होगा। उन्होंने बताया कि हालांकि ईंधन मानक भारत स्टेज (बीएस)-4 या इससे अधिक मानक की ईंधन से चलने वाले वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्र की अवधि 12 माह होगी। साथ ही अधिकृत एजेंसी द्वारा ऑनलाइन प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र जारी किये जाने का प्रावधान किया गया है। डॉ. प्रसाद ने बताया कि संशोधन नियमावली के तहत प्रदूषण नियंत्रण केंद्रों की स्थापना ऐसे स्थलों पर किया जाना आवश्यक है, जहां वाहनों का अधिकतम आवागमन होता है। इनमें पेट्रोल पंप, वाहन विक्रय केंद्र एवं सर्विस सेंटर शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे स्थलों पर वाहन प्रदूषण जांच केंद्र खोले जाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान की जा रही है।

होगी ऑनलाइन शुल्क जमा किये जाने की व्यवस्था 
प्रधान सचिव ने बताया कि आम लोगों को आसानी से वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों की अनुज्ञप्ति मिल सके अथवा अनुज्ञप्ति का नवीकरण आसानी से हो सके, इसके लिए ऑनलाइन शुल्क जमा किये जाने की व्यवस्था की जा रही है। डॉ. प्रसाद ने बताया कि पूर्व में वाहन प्रदूषण जांच केंद्र पर मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल अथवा ऑटोमोबाइल अनियंत्रण डिग्रीधारी या डिप्लोमाधारी को ही प्रत्येक वाहन प्रदूषण जांच केंद्र पर रखा जाना आवश्यक था। लेकिन, वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों की पर्याप्त संख्या में वृद्धि हो सके, इसके लिए इंटरमीडिएट या 12वीं कक्षा (विज्ञान के साथ) उत्तीर्ण व्यक्ति को प्रत्येक वाहन प्रदूषण जांच केंद्र पर रखे जाने का प्रावधान किया गया है। प्रधान सचिव ने बताया कि चलंत प्रदूषण जांच केंद्रों की स्थापना के लिए प्रावधान किये गये हैं ताकि अधिक से अधिक वाहनों की जांच की जा सके। उन्होंने बताया कि राज्य में अधिक से अधिक प्रदूषण जांच केंद्र की स्थापना हो सके इसके लिए राज्य सरकार द्वारा लिये जाने वाले अनुज्ञप्ति, नवीकरण, आवेदन सहित अन्य शुल्क में कमी की गयी है।

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