अपनी रोगप्रतिरोधक क्षमता मजबूत करें

 

रोग प्रतिरोधक क्षमता सब में अलग-अलग होती है। ऐसा क्यों होता है कि कई लोग कभी बीमार नहीं पड़ते और कई लोगों को जरा सा मौसम बदला, पानी में भीग गए, धूप में निकल गए कि फीवर आ दबोचता है। क्या ऐसा उनकी आनुवंशिकता के कारण होता है या स्वस्थ जीवनशैली और अच्छे खानपान के न होने के कारण उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है ? इसमें दो राय नहीं कि जींस का हमारे जीवन में अहम रोल है। अच्छी-बुरी जींस पाना हमारे हाथ में नहीं है मगर इम्यून सिस्टम को मजबूत किया जा सकता है। आजकल नई-नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। कारण सभी जानते हैं आज का विषाक्त वातावरण, मिलावटी खाद्य पदार्थ बनावटी जीवनशैली, प्रकृति से दूरी, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल, शारीरिक मेहनत की कमी आदि।
मौसम बदलते ही कभी सर्दी-जुकाम, खांसी, फ्लू व वायरल फीवर आदि परेशान करने लगते हैं तो कभी चिकनगुनिया, बर्ड फ्लू, स्वाइन, डेंगू फीवर का खौफ सताने लगता है।
बीमारी से बचने के लिए प्रॉपर केयर की जरूरत होती है, खासकर बच्चे और बूढ़ों को और भी ज्यादा।
आज व्यक्ति को एक साथ कई फ्रन्ट पर काम करना पड़ता है। स्त्रियों को भी घर बाहर की दोहरी जिन्दगी से जूझना पड़ता है। ऐसे में एक मजबूत शरीर की जरूरत और भी ज्यादा महसूस होती है। यह बहुत मुश्किल काम नहीं। एक हैल्दी लाइफस्टाइल, बैलेंस्ड डायट और एक्सरसाइज आपका काम पूर्ण कर देंगे।
अपने खाने में सुपरफूड शामिल करें
करेला:-  श्वास संबंधी तकलीफों के विरुद्ध शरीर का प्रतिरोध बढ़ाता है तथा इंफेक्शन से भी बचाता है।
पपीता:- कब्ज की शिकायत दूर करता है तथा डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए बहुत मुफीद भी है।
गाजर:- त्वचा, बाल, दृष्टि के लिए अच्छी होती है तथा प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है।
मौसमी:- जुकाम में फायदेमंद है, खुश्की मिटाती है और शरीर की प्रतिरोधक शक्ति और इम्युनिटी बढ़ाती है।
मेवा:- अखरोट व बादाम आदि मेवे सेहत के लिए लाभप्रद हैं लेकिन इन्हें सीमित मात्रा में लिया जाना चाहिए, साथ ही अलसी व तिल पाउडर भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए उपयोगी माने गए हैं।
प्रोटीन:- शाकाहारी लोग दूध, दही, पनीर, चीज, सोयाबीन जैसी वस्तुओं को अपनी डायट में शामिल करें।
सीरियल्स:- सुबह नाश्ते में बाजरा, ओट, सोया,, गेहूं का दलिया, स्प्राउट मूंग, मोठ, चना आदि में से दो एक चीजें शामिल करें।
मैग्नीशियम युक्त पदार्थ:- मैग्नेशियम मांसपेशियों को लचीला करने वाला तत्व है। एंटी इन्फलेमेटरी होने से यह आर्थराइटिस के मरीजों के लिए उत्तम है। श्वास से संबंधित तकलीफों से लड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मैग्नीशियम, बाजरा, ज्वार, मक्का, गेहूं, चना उड़द, राजमा, सोयाबीन, साबुत मूंग आदि में बहुतायत से पाया जाता है।
इसके अलावा काजू, बादाम, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट तथा आम, अलूचे जैसे फ्रूट्स के अलावा मूली,  ककड़ी में भी खूब पाया जाता है।
एक्सरसाइज नियमित करें:- केवल बैलेंस्ड डायट से ही बात नहीं बनेगी। उसे पचाने के लिये एक्टिव रहना जरूरी है।
एक्सरसाइज से पौष्टिक तथा संक्रमण से लड़ने वाले सेल्स का लगातार प्रवाह बना रहता है तथा अनावश्यक तत्व, टॉक्सिन शरीर से निकल जाते हैं।
एक्सरसाइज से हड्डियां मजबूत होती हैं। मसल्स मजबूत होते हैं जिससे बॉडी का बैलेंस और पॉस्चर इंप्रूव होता है।
कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज:- सैर करना, साइकल चलाना, तैरना और कूदना इसके अन्तर्गत आते हैं। इससे मोटापा छंटता है। 25 परसेंट मटॉबॉलिक रेट छह से आठ घंटे तक के लिये बढ़ा रहता है। हफ्ते में तीन से पांच दिन 20 मिनट के लिये ये एक्सरसाइज की जाए तो इनसे हार्ट और सकर्युलेटरी सिस्टम इंप्रूव किया जा सकता है।
लाइफस्टाइल में बदलाव
–    एक्टिव लाइफ जीएं। घंटों लगातार टी. वी., लैपटॉप से ही न चिपके रहें।
–    एलीवेटर, एस्केलेटर की जगह अगर सीढ़ियां हैं तो उनका उपयोग करें।
–    काम के बीच में ब्रेक लें और हल्की फुल्की एक्सरसाइज करें।
–    भरपूर अच्छी नींद लें। जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं। नेगेटिव सोच को करें टाटा, बाय-बाय।

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