अयोध्या फैसले के बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं ने अधिग्रहित 67 एकड़ जमीन से हिस्सा देने की मांग की

Ikbal Ansari

अयोध्या : राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में प्रमुख मुद्दई रहे इकबाल अंसारी तथा कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने यह मांग की है कि वर्ष 1991 में केन्द्र सरकार द्वारा अधिग्रहीत की गई जमीन में से ही मस्जिद निर्माण के लिए जगह दी जाए। गौरतलब है कि 1991 में केन्द्र सरकार ने विवादित ढांचे के आसपास की 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर लिया था। अयोध्या भूमि विवाद पर 9 नवंबर को उच्चतम न्यायालय का ,ऐतिहासिक फैसला सुनाए जाने के बाद अंसारी का यह बयान आया है। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेशानुसार अगर सरकार हमें मस्‍जिद के लिए जमीन देती है तो वही जमीन दें जो कि केन्द्र सरकार द्वारा अधिग्रहित 67 एकड़ जमीन का हिस्सा है। हमें वही जमीन स्वीकार है। हम कोई अन्य जमीन नहीं लेंगे।

अपने पैसे से खरीद सकते हैं जमीन

इस मामले पर मौलाना जमाल अशरफ नामक स्थानीय धर्मगुरु ने भी अधिकृत जमीन की मांग करते हुए सरकार पर निर्भर न रहने की बात कही है। उनका कहना है कि मस्जिद निर्माण के लिए मुसलमानो को केंद्र सरकार पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं है। वे अपने पैसे से भी जमीन खरीद सकते हैं। अगर सरकार हमें कुछ तसल्ली देना चाहती है तो उसे 1991 में अधिग्रहित की गई 67 एकड़ जमीन में से ही कोई हिस्सा देना चाहिए। उस जमीन पर कई कब्रिस्तान और सूफी संत काजी रकदवा समेत कई दरगाहे हैं।

हमारी लड़ाई मस्जिद के लिए थी, जमीन के लिए नहीं

मामले के एक अन्य मुद्दई हाजी महबूब ने कहा कि हम झुनझुना स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार को यह बात स्पष्ट करनी होगी कि हमें कहां पर जमीन दी जाएगी। वहीं, जमीअत उलेमा ए हिंद की अयोध्या इकाई के अध्यक्ष मौलाना बादशाह खान का यह कहना है कि हमारी लड़ाई बाबरी मस्जिद के लिए थी न कि जमीन के लिए।

मस्जिद के बदले हमें कोई भी जमीन स्वीकार नहीं है। अगर हमें कोई जमीन दी जाती है तो उसे भी हम मंदिर निर्माण के लिए दे देंगे।

आकर्षक और प्रमुख स्‍थान पर तलाशी जा रही है जमीन

सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है कि इन सब बयानबाजी के बीच मस्जिद निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्या के भीतर या इर्दगिर्द जमीन की तलाश शुरू कर दी है। एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि मस्जिद निर्माण के लिए हमें किसी आकर्षक एवं प्रमुख स्‍थान पर जमीन तलाशने के लिए कहा गया है।

26 नवंबर को जमीन के संबंध में होगा फैसला

गौरतलब है कि आगामी 26 नवंबर को एक बैठक के तहत जमीन को लेकर फैसला लिया जाएगा। अयोध्या मामले के प्रमुख पक्षकार सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड उत्तर प्रदेश ने इस बात की जानकारी दी है।

बता दें कि 9 नवंबर को उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अयोध्या भूमि विवाद पर अपना फैसला सुनाया था जिसके तहत विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण कराने और मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए किसी प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया था।

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