ओडिशा के रसागोला को मिला जीआई टैग, बंगाल का रोसोगुल्ला रह गया पीछे

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नई दिल्ली: ओडिशा ने बंगाल के रोसोगुल्ला को हराकर ‘रसगुल्ला वॉर’ जीत लिया है जिसके बाद अब यह ‘ओडिशा रसागोला’ के तौर पर जाना जाएगा। रसगुल्ला के जीआई (जियोग्राफिकल इंडीकेशन/भौगोलिक सांकेतिक) को लेकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच छिड़ी लड़ाई का फैसला ओडिशा के पक्ष में गया है। भौगोलिक संकेत रजिस्ट्रार, चेन्नई ने वस्तु भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण), कानून 1999 के तहत इस मिठाई को ओडिशा की मिठाई करार दिया है। बता दें कि रसागोला भगवान जगन्नाथ को अर्पित की जाने वाली प्रसिद्ध मिठाईयों में से एक है।

2017 में बंगाल को मिली थी जीआई टैग

मालूम हो कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच इस बात को लेकर कई साल से खींचतान चल रही थी कि आखिर रसगुल्ला सबसे पहले कहां बनाया गया था ? 2017 में जीआई रजिस्ट्री ने बंगाल के दावे को स्वीकार कर लिया और उसके पक्ष में फैसला दिया था। उसके बाद से बंगाल को जीआई टैग जारी कर दिया गया था।

दो म‌हीने का समय दिया गया था

इसके बाद रसगुल्ले को लेकर ओडिशा स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (ओएसआईसी) और रीजनल डिवेलपमेंट ट्रस्ट ने जनवरी 2018 में इस मिठाई के लिए बंगाल को जीआई टैग दिए जाने के खिलाफ अपील की थी। इस आपत्ति पर विचार करते हुए जीआई रजिस्ट्री ने ओडिशा को दो महीने का समय दिया गया था कि वह रसगुल्ले के आविष्कार को लेकर अपने दावों को सत्यापित करने का सबूत दें। रसगुल्ला के आविष्कार और बनाने की विधि से लेकर तमाम बातों को सबूत सहित पेश करना था।

300 से ज्यादा उत्पादों को जीआई मिल चुका है

किसी क्षेत्र विशेष के उत्पादों को जियोग्रॉफिल इंडीकेशन टैग (जीआई टैग) से खास पहचान मिलती है। जीआई टैग किसी उत्पाद की गुणवत्ता और उसके अलग पहचान का सबूत है। चंदेरी की साड़ी, कांजीवरम की साड़ी, दार्जिलिंग चाय,बनारसी साड़ी, तिरुपति के लड्डू, कांगड़ा की पेंटिंग, नागपुर का संतरा, कश्मीर का पश्मीना और मलिहाबादी आम समेत अब तक 300 से ज्यादा उत्पादों को जीआई मिल चुका है। गौरतलब है कि ओडिशा को दिया गया यह प्रमाणपत्र 22 फरवरी 2028 तक वैध रहेगा।

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