अब हर घर में नल से जल पहुंचाएगी मोदी सरकार, इसीलिए बनाया जलशक्ति मंत्रालय

दिल्लीः अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार का पूरा जोर स्वच्छ भारत मिशन पर रहा तो दूसरे कार्यकाल में वह देश के हर घर में नल से जल पहुंचाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया है। इसका प्रभार जोधपुर से सांसद बने गजेंद्र सिंह शेखावत को बनाया गया है। सूत्रों के अनुसार जल शक्ति मंत्रालय में जल संसाधन, नदी विकास, गंगा जीर्णोद्धार और पेय जल एवं स्वच्छता विभाग को शामिल किया जा सकता है। नल जल योजना के तहत सरकार ने 2024 तक देश के हर घर में पानी की पाइप लाइन और नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

चुनौती बड़ी है गजेंद्र के सामने

जल शक्ति मंत्रालय की कमान कैबिनेट मंत्री बनाए गए जोधपुर के सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत को सौंपी गई। इस मंत्रालय की अहमियत बहुत अधिक है क्योंकि देश के अधिकांश हिस्सों में पेयजल का संकट गहराया हुआ है। ऐसे में शेखावत के लिए मोदी की उम्मीदों पर खरा उतरना किसी बड़ी चुनौती से कम साबित नहीं होगा।

पाकिस्तान बहकर जा रहे पानी को रोकना

सबसे अहम चुनौती पाकिस्तान बहकर जा रहे भारत के हिस्से के पानी को रोकने की परियोजना पर काम करने की होगी। ताकि, इस पानी का देश में ही उपयोग किया जा सके। वहीं अलग-अलग राज्यों के बीच पानी को लेकर चल रहे टकरावों से भी पार पाना इतना आसान नहीं होने वाला। सिंधु जल समझौते के तहत भारत को रावी, ब्यास व सतलुज नदियों के सम्पूर्ण पानी के उपयोग का हक है। जबकि चिनाब, सिंधु व झेलम नदियों का पानी पाकिस्तान को दिया गया। पाकिस्तान को दी गई तीन नदियों के कुछ पानी को भारत भी काम में ले सकता है, लेकिन आजादी के इतने बरस बाद भी भारत अभी तक अपने हिस्से में आई रावी, ब्यास व सतलुज नदियों का पानी पूरी तरह से नहीं रोक पाया। इस पानी को रोकने के लिए तीन बांध बनने थे, लेकिन उनमें से एक का काम ही शुरू हो पाया और वह भी बरसों से अधूरा है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि शेखावत इस चुनौती से कैसे पार पाते हैं।

देश में पेयजल संकट

देश में ज्यादातर राज्यों में भूजल स्तर गिरता जा रहा है। ऐसे में इस समस्या के स्थाई समाधान की दिशा में शेखावत को काम करना होगा। पार्टी संगठन की तरफ से सीमावर्ती बाड़मेर-जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में काम करने के दौरान शेखावत इस समस्या को बेहद नजदीक से देख चुके हैं। रेगिस्तान में पानी सहेजने के पारम्परिक तरीकों को आगे बढ़ाने से भी पेयजल संकट से कुछ हद तक निपटा जा सकता है।

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