झारखंड में किसान और खेतिहरों को अब बिरसा किसान के नाम से जाना जाएगा

रांची : विश्व आदिवासी दिवस पर झारखंड के किसानों को एक नया नाम मिला है। झारखंड में अब किसानों और खेतिहर मजदूरों व खेती से जुड़े सभी लोगों को बिरसा किसान के नाम से जाना जाएगा। इतना ही नहीं किसानों की पगड़ी का रंग भी गुलाबी से बदलकर हरा कर दिया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कृषि, पशुपालन व सहकारिता विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में इसकी घोषणा की। उन्होने कहा कि झारखंड के किसान का इतिहास अन्य राज्यों से अलग हैं। हमारे पूर्वज इस राज्य के जल, जंगल जमीन को बचाने का संघर्ष उस समय से कर रहे हैं जब लोगों ने इसका सपना भी नहीं देखे। आजादी की लड़ाई से पहले से हमारे पूर्वज इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। सोरेन ने कहा कि यह हमारा दुर्भाग्य है कि हमें अंडा दूसरे राज्यों से आयात करना पड़ता है जबकि ये हमारी पारंपरिक व्यवस्थाएं है। गांव में गाय, बकरी, मुर्गी सुअर के साथ नीम, बैर, महुआ और मुंगा का पेड़ भी होना चाहिए। यही हमारी पूंजी थी, लेकिन ये कहां गायब हो गई ये हम समझ ही नहीं पा रहे हैं। इससे पहले विश्व आदि‌वासी दिवस पर सोमवार को 743 करोड़ के योजनाओं का शुभारंभ किया गया। इसमें 587 करोड़ का केसीसी किसानों को दिया जाएगा। इसके अलावा 147 करड़ो रुपये से पशुधन विकास योजना के माध्यम से किसानों को दुधारु गाय, बकरी, सुकर, मुप्हा बत्तख आदि खरीदने के लिए 100% तक अनुदान दिया जाएगा।

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