महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन के बाद उनके साथ अशोभनीय व्यवहार किया गया : लालू प्रसाद

पटना : राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद ने शुक्रवार को बिहार की नीतीश कुमार सरकार पर महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के साथ ‘अशोभनीय’ व्यवहार करने का आरोप लगाया। आरोप है कि वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन के बाद उनके परिजनों को एंबुलेंस भी मुहैया नहीं करायी गयी थी।
नासा एवं कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में काम कर चुके वशिष्ठ नारायण सिंह (74) ने लंबी बीमारी के बाद पटना चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। पूरे राजकीय सम्मान के साथ प्रदेश के भोजपुर जिले के माहुली गांव में गंगा नदी के किनारे शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वशिष्ठ नारायण के भतीजे मुकेश सिंह ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जय कुमार सिंह ने राज्य सरकार की ओर से वशिष्ठ नारायण सिंह के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। वशिष्ठ नारायण के लिए राज्य सरकार के संवेदनहीन रवैये की निंदा करते हुए लालू प्रसाद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आड़े हाथों लिया। लालू ने ट्वीट कर कहा, ‘क्या बड़बोली डबल इंजन सरकार उस महान विभूति को एक एंबुलेंस तक प्रदान नहीं कर सकती थी?’ उन्होंने कहा, ‘बदनामी होने के बाद क्या किसी के पार्थिव शरीर को सड़क के बीच रोककर उसे श्रद्धांजलि देना एक मुख्यमंत्री को शोभा देता है? क्या अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान मुख्यमंत्री कभी उन्हें देखने गए ?’ चारा घोटाले में रांची में जेल की सजा काट रहे लालू प्रसाद ने ट्वीट कर वशिष्ठ नारायण सिंह को श्रद्धांजलि दी। परिवार की सलाह पर लालू प्रसाद के ट्विटर हैंडल का प्रबंधन उनका कार्यालय करता है।
एक अन्य ट्वीट में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमारे कार्यकाल में मैंने उनका (सिंह का) अच्छे से अच्छे अस्पताल में इलाज करवाया। उनकी सेवा करने वाले पारिवारिक सदस्यों को सरकारी नौकरी दी, ताकि वो पटना में उनकी अच्छे से देखभाल कर सकें।’ उन्होंने कहा, ‘महान गणितज्ञ आदरणीय डॉ. वशिष्ठ बाबू को कोटि-कोटि नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।’ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन के बाद एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया और समाचार चैनलों में तेजी से प्रसारित हुई। इस क्लिप में वशिष्ठ नारायण सिंह के छोटे भाई अयोध्या प्रसाद सिंह बिहार के शीर्ष अस्पताल के आपातकाल विभाग के बाहर स्ट्रेचर पर रखे बड़े भाई के पार्थिव शरीर के पास खड़े दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक मुहैया नहीं करवाया और यही कारण है कि शव अस्पताल परिसर में खुले में रखा हुआ था। यह पूछने पर कि मदद के लिए उन्होंने किसी अधिकारी से संपर्क क्यों नहीं किया, अयोध्या सिंह ने वशिष्ठ नारायण सिंह का मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाते हुए कहा, ‘मुझे किसे अपनी समस्या बतानी चाहिए। मेरी समस्या सुनने वाला कोई नहीं था। मैं एक किराये की निजी एंबुलेंस से शव को अपने पैतृक गांव ले जाऊंगा।’
बर्कले के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से वर्ष 1969 में गणित में पीएचडी तथा ‘साइकिल वेक्टर स्पेस थ्योरी’ पर शोध करने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह लंबे समय से सीजोफ्रेनिया रोग से पीड़ित थे और पीएमसीएच में उनका इलाज चल रहा था। वाशिंगटन में गणित के प्रोफेसर रहे सिंह वर्ष 1972 में भारत लौट आये थे। 1974 में उनका विवाह हुआ लेकिन सीजोफ्रेनिया से पीड़ित होने के कारण उनकी पत्नी शादी के कुछ साल बाद उन्हें छोड़कर चली गयीं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर और भारतीय सांख्यकीय संस्थान, कलकत्ता में अध्यापन का कार्य किया। वे बिहार के मधेपुरा जिला स्थित भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे थे।

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