बिहार में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई दीपावली

पटना : बिहार में अंधकार पर प्रकाश के विजयोत्सव का पर्व दीपावली रविवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दीपावली के मौके पर मंदिरों और बाजार को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। विभिन्न मंदिरों में रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मिठाई की दुकानों में भी काफी भीड़ देखी गयी। बाजार लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों, फूलों, सजावटी सामानों, पटाखों और घरौदों से सजा था। हर उम्र के लोग दिनभर खरीददारी के बाद अपने घरों को रंग बिरंगे बल्बों, मोमबत्ती, दीये और रंगोली के जरिये सजाने में व्यस्त रहे।
शाम ढलते ही सभी घर, दुकान और कार्यस्थल रंग बिरंगे बल्ब, दीया और मोमबत्ती से जगमागा उठे। लोगों ने शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की पूजा अर्चना की। इस अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को दीपावली की बधाइयां दी और मिठाइयां तथा उपहार भी भेंट में दिये। बिहार में कई विद्यालयों ने पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर पटाखों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था। लोगों को उनकी गाढ़ी कमाई पटाखों पर बर्बाद नहीं करने के लिए जागरूक किया गया। दीपावली दीपों का त्यौहार है और इस दिन रोशनी का विशेष महत्व होता है। कार्तिक अमावस्या की काली रात को दीयों से उजाले में बदलने की यह परंपरा बहुत पुरानी है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय कार्तिक अमावस्या को ही लक्ष्मीजी प्रकट हुई थीं इसलिए इसी दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। कलयुग में सांसारिक वस्तुओं और धन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस युग में लक्ष्मीजी ही ऐसी देवी हैं जो अपने भक्तों को संसारिक वस्तुओं से परिपूर्ण करती हैं और धन देती हैं।
ऐसी भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीरामचंद्र चौदह वर्ष का वनवास काटकर तथा रावण का वध कर अयोध्या वापस लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने राम के राज्यारोहण पर दीपमालाएं जलाकर महोत्सव मनाया था। उसी परंपरा को आज भी हम मानते हैं और दीपावली पर दीये जलाकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम को याद करते हैं। दीपावली के दिन लक्ष्मी, गणेश की पूजा करने का विधान है। इसके साथ भगवान राम और सीताजी को भी पूजा जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि गणेश पूजन के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। दीपावली धार्मिक कारणों से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी एक अहम पर्व है। ज्यादातर लोग इस दिन घर की पूरी सफाई और रंगाई करते हैं, जिससे जहां पूरे साल सफाई नहीं होती वहां भी सफाई हो जाती है। साथ ही बरसात के कारण जो कीट उत्पन्न होते हैं वह दीपावली के दीये और पटाखे में नष्ट हो जाते हैं।

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