क्या खुद को हटाने के लिए विधेयक पर राज्यपाल देंगे मंजूरी ?

चांसलर – विजिटर बिल : अब विधानसभा की बारी, फिर आगे की होगी तैयारी
गहमागहमी भरा हो सकता है यह सत्र
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के चांसलर पद से राज्यपाल को हटाने की पूरी प्रक्रिया राज्यपाल से होकर ही गुजरती है। कैबिनेट की बैठक में इन प्रस्तावों पर देर नहीं करते हुए मंजूरी मिल गयी है, अब विधानसभा में भेजने की बारी है। इस बार विधानसभा में करीब 6 बिल आ रहे हैं जो कि शिक्षा से संबंधित हैं। जानकारों का कहना है कि विधानसभा में ये बिल पास हो जाएंगे लेकिन उन बिल पर हस्ताक्षर के लिए राज्यपाल के पास ही भेजना होगा अर्थात राज्य के विश्वविद्यालयों के आचार्य पद से राज्यपाल को हटाने के लिए राज्यपाल से ही अनुमति लेनी होगी। ऐसे में यह चर्चा ते​ज है कि क्या खुद को हटाने के लिए विधेयकों पर राज्यपाल मंजूरी देंगे? कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि राजभवन में बिल को लेकर कितना समय लग सकता है या नहीं भी लग सकता है, यह कहना मुश्किल है। ऐसे में सरकार दूसरा रास्ता अपना सकती है। हालांकि यह माना जा रहा है कि इन सब में समय लग सकता है। इससे पहले हावड़ा नगर निगम अमेंडमेंट बिल को लेकर राज्यपाल और स्पीकर के बीच विवाद जारी है। राज्यपाल ने कहा है कि उस अमेंडमेंट बिल के संबंध में उन्हें पूरी जानकारियां उपलब्ध नहीं करायी गयी हैं। बता दें कि राज्यपाल तथा सीएम के बीच कई मुद्दों पर विवाद सामने आया है। चुनाव बाद राज्य में हुई हिंसा को लेकर भी सीएम और राज्यपाल में टकराव देखा गया। तृणमूल सरकार के मंत्री से लेकर नेता राज्यपाल पर भाजपा का होकर काम करने का आराेप लगाते आये हैं, वहीं राज्यपाल का कहना है कि वे जो भी काम करते हैं वह संविधान के दायरे में रहकर करते हैं। चाहे बात विधानसभा का सत्र बुलाने की हो या किसी नये विधायक को शपथ दिलाने की।

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