लोकसभा के सांसदों को क्यों उतारा गया चुनाव में, चर्चा हुई तेज

मंत्रीसभा का प्रदर्शन या फिर उम्मीदवारों की कमी ?
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : लोकसभा के सांसदों को भी इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। रविवार को भाजपा ने तीसरे और चौथे चरण के उम्मीदवारों की घोषणा की जिसमें 4 सांसदों को भी चुनावी मैदान में उतारा गया है। हुगली की सांसद लॉकेट चटर्जी, आसनसोल के सांसद बाबुल सुप्रियो और कूचबिहार के सांसद नि​शिथ प्रमाणिक को चुनावी मैदान में उतारा गया है जबकि राज्यसभा के सांसद स्वपन दासगुप्ता को भी उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि आने वाली सूची में कुछ और सांसदों के नाम भी रह सकते हैं। राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली का नाम भी उम्मीदवारों में रहने की संभावना जतायी जा रही है। हालांकि अब सवाल उठ रहे हैं कि क्यों सांसद और यहां तक कि केंद्रीय मंत्री को भी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बना दिया गया है ? इसे लेकर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, हम सत्ता में आ रहे हैं। मंत्रीसभा कैसी होगी, इसकी स्पष्ट तस्वीर उम्मीदवारों की सूची में ही है। हालांकि सांसदों को उतारे जाने को लेकर तृणमूल के प्रवक्ता व राज्य के मंत्री तापस राय ने भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा में अभी नये और पुराने के बीच तेज लड़ाई चल रही है। ये सब मिटाने के अलावा उम्मीदवार होने के जैसा कोई चेहरा भी उनके पास नहीं है। यही बात उम्मीदवारों की सूची में प्रकाशित हुई है। भाजपा अगर जीत गयी तो मंत्रीमण्डल कैसा होगा, इस बारे में पूछे जाने पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि उम्मीदवारों की सूची में ही समझ जाएंगे। अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या भाजपा ने उम्मीदवारों की इस सूची के माध्यम से इसी मंत्रीसभा को दिखाने की कोशिश की ?
जिन 3 लोकसभा सांसदों को उम्मीदवार बनाया गया है, उनमें सबसे अहम बाबुल सुप्रियो हैं। लगातार दो बार लोकसभा चुनाव में आसनसोल सीट से बाबुल जीत चुके हैं और दोनों बार ही उन्हें मोदी मंत्रीमण्डल में जगह मिली है। ऐसे में इस बार भाजपा विधानसभा चुनाव में भी बाबुल पर पार्टी ने भरोसा जताया है। हालांकि सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ाये जाने को लेकर चर्चा जोरों पर है, अब देखना यह है कि पार्टी की रणनीति किस हद तक काम करती है।

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