डीए का आधार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक क्यों नहीं : हाई कोर्ट

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सरकार के कर्मचारियों को डीए देने के मामले की सुनवायी करते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस हिरणमय भट्टाचार्या ने कहा कि पूरे देश में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर डीए का भुगतान किया जाता है। फिर एडवोकेट जनरल से सवाल था कि आप का पैमाना अलग क्यों है। इसके बाद ही अगला सवाल था कि जब 2011 तक केंद्र और राज्य सरकार की डीए की दरें एक बराबर थी तो इसके बाद बदल कैसे गईं।
राज्य सरकार ने डीए की दरों के बाबत स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की है। कॉनफेडरेशन ऑफ स्टेट गवर्नमेंट इम्पलायिज की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट अमजद अली ने बताया कि अभी तक एडवोकेट जनरल (एजी) किशोर दत्त की बहस पूरी नहीं हो पाई है। डिविजन बेंच ने एडवोकेट जनरल से कहा है कि वे अपना पाइंट्स दस सितंबर तक लिख कर दे दें। इसकी कापी प्रतिवादियों को दी जाएगी और वे अपना जवाब भी दे देंगे। अगली सुनवायी 14 और 15 सितंबर को होगी और उम्मीद है कि उस दिन मामले का निपटारा हो जाएगा। एजी की दलील थी कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से डीए का कोई लेनादेना नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि डीए एक्सग्रेसिया है और इसका भुगतान देने वाले की क्षमता पर निर्भर करता है। यहां गौरतलब है कि हाई कोर्ट के तत्कालीन देवाशिष करगुप्ता और जस्टिस सराफ के डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि डीए राज्य सरकार के कर्मचारियों का बुनियादी अधिकार है।

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