कुछ स्कूल हैं खुलने को तैयार तो कुछ अब भी कर रहे हैं इनकार

कोलकाता : कोविड महामारी के बीच स्कूल करीबन 8 महीने से बंद हैं और पढ़ाई से लेकर इग्जाम भी ऑनलाइन ही हो रहे हैं। सब कुछ चल रहा है लेकिन छात्रों की पढ़ाई पर कहीं न कहीं असर जरूर पड़ रहा है। ऐसे में स्कूलों को दोबारा खोलने को लेकर काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) की ओर से एक चिट्ठी राज्य सरकारों को दी गयी है। काउंसिल की ओर से राज्य सरकारों से अनुरोध किया गया है कि 10वीं और 12वीं के बोर्ड के इग्जाम को देखते हुए 4 जनवरी से स्कूल खोलने की अनुमति दी जाये। उनकी ओर से कहा गया है कि इग्जाम से पहले छात्रों के मन में जो भी जिज्ञासा होती है कुछ प्रश्नों को लेकर उसके लिए स्कूल खोलना बेहद जरूरी है।

सन्मार्ग ने सीआईएससीई बोर्ड से जुड़े महानगर के स्कूलों से यह जानने की कोशिश की कि क्या यह उचित समय है स्कूल खोलने का क्योंकि हम आपको बता दें कि कुछ ऐसे मामले प्रकाश में आये हैं जहां स्कूलों के खुलते ही कई बच्चे संक्रमण के शिकार हो गये और स्कूलों को तुरंत ही बंद करना पड़ा।

अभी तो 1 महीने का है समय, कुछ भी हो सकता है

द हेरिटेज की प्रिंसिपल सीमा सप्रु ने कहा कि अभी कुछ फाइनल नहीं हुआ है और वैसे भी अभी एक महीने का समय है, यहां तो पल भर में कुछ भी हो सकता है। हालांकि हमारा स्कूल खुलने को पूरी तरह से तैयार है। अब यह अभिभावकों पर निर्भर करता है कि वह अपने बच्चों को भेजते हैं या नहीं।

सीआईएससीई की ओर से लिया गया सही निर्णय

नेशनल इंग्लिश स्कूल की प्रिसिंपल मौसमी साहा ने बताया कि सीआईएससीई की ओर से लिया गया निर्णय बिल्कुल सही है, क्योंकि देखा जाये तो सारे सेक्टर खुले हैं केवल स्कूल ही बंद हैं इसलिए अब स्कूलों को भी खोल देना चाहिए। छात्रों के स्वास्थ्य काे ध्यान में रखते हुए स्कूल में सारे इंतजाम कर दिये गये है। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन को भी माना जायेगा और सभी छात्रों को एक साथ ना बुलाकर पार्ट-पार्ट करके बुलाया जायेगा।

6 फीट की दूरी पर रखी गयी है छात्रों की सीट

एम.पी. बिड़ला फाउंडेशन हायर सेकेंडरी स्कूल, बेहला के महाप्रबंधक सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि काउंसिल की ओर से जो भी आदेश होंगे हम उसके लिए तैयार हैं। हमने क्लास रूम भी तैयार कर दिये हैं। एक क्लास में 15 से 20 बच्चों को ही बैठाया जायेगा। एक छात्र की सीट दूसरे छात्र से 6 फीट की दूरी पर रखी गयी है। इनका खुद का मानना है कि फिलहाल 9 तक के बच्चों के क्लास को बंद ही रखना ठीक होगा और 10वीं से 12वीं के बच्चों को भी सिर्फ प्रैक्टिकल क्लासेज के लिए ही बुलाया जाये।

 

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