बसों में किराया ठीक लिया जा रहा है या नहीं, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से तलब की रिपोर्ट

23 मार्च 2020 काे डीजल का दाम : 64.65 रु.
वर्तमान में डीजल का दाम : 92 रु.
हावड़ा में उतरते हैं लगभग 12 लाख यात्री
कोलकाता में उतरते हैं लगभग 6 लाख यात्री
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : निजी बसों व मिनी बसों को लेकर राज्य सरकार से कलकत्ता हाई कोर्ट ने रिपोर्ट तलब की है। आगामी 2 सप्ताह के अंदर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की डिविजन बेेंच ने राज्य सरकार को रिपोर्ट जमा देने के लिए कहा है। यहां उल्लेखनीय है कि कोविड काल के बाद से बसों में अतिरिक्त किराया लिया जा रहा है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर राज्य सरकार की ओर से बसों का किराया नहीं बढ़ाया गया है। गुरुवार को हाई कोर्ट द्वारा मुख्य तौर पर 3 विषयों को लेकर रिपोर्ट तलब की गयी है। पहला विषय है कि सभी निजी व मिनी बसों में किराये की सूची लगायी गयी है या नहीं। राज्य सरकार द्वारा तय किराये के अनुसार ही किराया लिया जा रहा है या नहीं। कहीं अतिरिक्त किराया ना लिया जाये, ये सुनिश्चित करना भी राज्य की जिम्मेदारी होगी। राज्य सरकार को यह बताना होगा कि बस किराया को लेकर यात्रियों की कोई शिकायत रहने पर उसके लिए क्या कदम उठाये गये। किराये पर नहीं है राज्य सरकार का नियंत्रणयहां उल्लेखनीय है कि कोविड काल में लॉकडाउन के बाद से ही निजी बसों के लिए कोई निर्धारित किराया नीति लागू नहीं है। इस आरोप के साथ गत फरवरी महीने में कलकत्ता हाई कोर्ट में एडवोकेट प्रत्यूष पटवारी ने पीआईएल किया था। उनका दावा है कि वर्ष 2018 के बाद से किराये की नयी सूची तैयार नहीं की गयी है। इस कारण पुरानी सूची के अनुसार ही किराया लिया जाना चाहिये जबकि बसों में मनमाने तौर पर किराया लिया जा रहा है। गत 22 फरवरी को अदालत ने राज्य के परिवहन सचिव से इस संबंध में हलफनामा तलब किया था। परिवहन विभाग का कहना है कि विभिन्न जिलों की परिस्थितियों को देखते हुए किसी बस का रूट, समयसूची व किराया परिवहन का क्षेत्रीय प्रबंधन यानी आरटीओ तय करता है। परिवहन विभाग इस संबंध में हस्तक्षेप नहीं करता।
क्या कहते हैं निजी बस संगठन
ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट के महासचिव तपन बनर्जी ने कहा, ‘किराया बढ़ाकर लेने के अलावा कोई उपाय नहीं है। कोलकाता में लगभग डेढ़ लाख ऑटो चलते हैं, इसके किराये पर कौन नियंत्रण करेगा? अब कोर्ट और राज्य सरकार ये तय करे कि किराया कैसे बढ़ाना है।’ इसी तरह सिटी सबअर्बन बस सर्विसेज के टीटो साहा ने कहा, ‘आय-व्यय में सामंजस्य कर राज्य सरकार किराया तय करे क्योंकि। जिस प्रकार डीजल का दाम बढ़ा है, ऐसे में यात्री अतिरिक्त किराया देने से इनकार नहीं कर रहे हैं। सड़क पर बसें अब भी चल रही हैं, ये ही बड़ी बात है। हर रूट में लगभग 25% बसें कम हो गयी हैं।’ इसी तरह ऑल बंगाल बस एण्ड मिनी बस सिंडिकेट के महासचिव राहुल चटर्जी ने कहा कि यात्री चाहते हैं कि सड़कों पर बसें रहे। ऐसे में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रक्षा के लिए निर्णय लेना होगा। अब अदालत को देखना होगा कि राज्य सरकार किराये को लेकर कोई निर्णय लेती है या नहीं। बस मालिकों और यात्रियों के बीच सामंजस्य रक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार को देखनी होगी।

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