दीदी की सभा में शामिल होने आये ग्रामीण जब कोलकाता में भटक गये रास्ता

– धर्मतल्ला में मेले जैसा माहौल था
– अलग-अलग अंदाज में शामिल हुए कार्यकर्ता
– विक्टोरिया, चिड़ियाखाना और कंक्रीट जंगल देख हैरान ग्रामीण
कोलकाताः घूमना भला किसे नहीं पसंद। बस मौका मिलना चाहिए। बंगाल के सुदूर गांवों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए 21 जुलाई की सभा घूमने की भी एक बहुत बड़ी वजह है। तृणमूल कांग्रेस के शहीद दिवस की सभा में उमड़े जनसैलाब में बहुत बड़ी तादाद ऐसे लोगों की थी जो कोलकाता आने का समय नहीं निकाल पाते हैं। सीएम ममता बनर्जी को सुनने और वक्त मिलते ही कोलकाता की सैर करने का मौका साल में इन्हें एक ही बार मिलता है। हर साल सभा खत्म होते ही ये लोग अपने परिवार के साथ कोलकाता घूमने निकल पड़ते हैं। परेशानी तब आती है जब घूमते हुए वे रास्ता भटक जाते हैं। शहीद दिवस में आए ग्रामीण और दूर दराज के वाशिंदे शहर के प्रमुख स्थलों-चिड़ियाखाना, विक्टोरिया जाते दिखे।
धर्मतल्ला के आसपास के इलाकों में मेले जैसा माहौल था। लोगों की प्यास बुझाने के लिए हॉकर पानी की बोतलें बेचते दिखे। खाने के शौकीन लोगों के लिए एस्प्लानेड मेट्रो स्टेशन के आस-पास पकौड़े और सैंडविच भी बिक रहे थे। ग्रामीणों के साथ आए बच्चे आइसक्रीम खाने की जिद करते दिखे। लंबे समय के बाद कोलकाता आए कुछ लोग घूमते वक्त रास्ता भी भटक गये। धर्मतल्ला में बंगाल के दूर दराज के इलाकों से आए लोग कोलकाता के कंक्रीट जंगल को देख बेहद खुश दिखाई दिये। कोई विक्टोरिया घूम लेना चाहता था, कोई बच्चों को चिड़ियाखाना ले जाने के लिए बेचैन था। कोलकाता में बड़ी बड़ी इमारतों को देख ग्रामीण हैरान थे। गांवों से बहुत दिनों बाद बाहर निकले लोग बेहद उत्साहित थे। तृणमूल के शहीद दिवस में हर कोई एक अलग ही अंदाज में दिखा। कोई टोली अलग किस्म की टोपी पहने घूम रही थी। कहीं महिलाओं का समूह आदिवासियों के परिधान में दिखा। लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए कोई कार्यकर्ता अपनी बाइक पर अलग ही अंदाज में नजर आया।
तृणमूल के ‘मे आई हेल्प यू’ कैम्प में रह-रह कर गुम हुए लोगों के नामों की घोषणा हो रही थी। कोलकाता में वृहस्पतिवार को भीड़ कुछ ज्यादा भी थी और दूसरे दिनों से थोड़ी अलग भी। बंगाल के दूर दराज के इलाकों से हजारों लोग सड़कों पर ही नहीं मेट्रो में भी घूमते दिखे। भीड़ इतनी की पैर रखने की जगह नहीं थी। गांव के सीधे सादे लोग हाथ में तृणमूल का झंडा और बैनर लिए सड़कों पर चलते दिखे। अपनी नेत्री को सुनने के साथ ही अपनों के साथ कोलकाता घूमने की इन यादों को वे साल भर संजोये रहते हैं।

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