…जब जमीनी हकीकत जानने निकले शाह के ‘5 पांडव’

कोलकाता : राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और सभी पार्टियां इसकी तैयारी में भी जुट गयी हैं। हालांकि भाजपा की ओर से चल रही जबरदस्त तैयारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है ​कि अभी से गृह मंत्री अमित शाह के ‘5 पांडव’ पश्चिम बंगाल की जमीनी हकीकत जानने के लिए निकल चुके हैं। भाजपा ने पूरे राज्य को 5 सांगठनिक जोन में बांटा है जिनमें राढ़ बंग, मिदनापुर, कोलकाता, उत्तर बंग और नवद्वीप जोन शामिल हैं। कोलकाता जोन में दुष्यंत गौतम, मिदनापुर जोन में सुनील देवधर, राढ़ बंग जोन  में विनोद सोनकर, नवद्वीप जोन में विनोद तावड़े और उत्तर बंग जोन में हरिश  द्विवेदी ने हाल में बैठक की थी। प्रदेश के नेताओं के साथ अलग – अलग बैठक में कई तरह की बातें सामने आयीं जिसमें नये और पुराने के बीच द्वंद्व से लेकर पद को लेकर विवाद की बातें भी शामिल हैं।
एक-एक कर नेताओं के साथ की बैठक
सभी केंद्रीय नेताओं ने एक-एक कर राज्य के नेताओं के साथ बैठक की। इसमें जिलाध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष, महासचिव और ऑब्जर्वर शामिल थे जिनके साथ केंद्रीय नेताओं ने अलग – अलग बैठक की। ऐसे में राज्य के नेताओं को भी अच्छा मौका मिला अपनी शिकायतें सीधें केंद्रीय नेताओं तक पहुंचाने का और केंद्रीय नेताओं ने भी उनकी समस्याएं और शिकायतें गौर से सुनीं। कार्यकर्ताओं से पहले उनका परिचय जाना गया और उसके बाद उनकी समस्याएं सुनी गयीं। कुछ नेताओं से इंटरव्यू के समान सवाल भी किये गये।
कार्यालय है या नहीं, यह भी पूछा गया
पार्टी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेताओं ने ये भी पूछा कि कहां भाजपा का पार्टी कार्यालय है और कहां नहीं हैं। जहां पार्टी कार्यालय नहीं है, उन स्थानों पर कार्यालय बनाने की बात भी केंद्रीय नेताओं ने कही। इसके अलावा जिन स्थानों पर चुनाव लड़ने के लिए आधारभूत सुविधाओं की कमी है, वहां अगले 15 दिनों के अंदर बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए कहा गया। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की अगर कहीं कमी है, उसे भी दूर करने के निर्देश दिये गये। चुनाव में क्या कार्य मिला, केंद्र से क्या अपेक्षाएं हैं, इस तरह के सवाल भी पूछे गये। पोलिंग बूथों पर पूरी तरह नेटवर्क फैलाने पर जोर दिया गया।
कुछ नेताओं ने पूछा, चिटफंड में गिरफ्तारी क्यों नहीं
पार्टी सूत्रों ने बताया कि बैठक में नेताओं ने चिटफंड से जुड़े मुद्दों पर भी शिकायतें केंद्रीय नेताओं से की। राज्य के कुछ नेताओं ने केंद्रीय नेताओं से पूछा कि सारधा, नारदा जैसे ​चिटफंड मामलों में कोई गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस बैठक से पार्टी में सकारात्मक असर तो पड़ा ही है, लेकिन तृणमूल की बौखलाहट बढ़ गयी है। यही कारण है कि बार – बार केंद्रीय नेताओं को ‘बाहरी’ का तगमा देने की कोशिश की जा रही है।
पद काे लेकर कुछ नेताओं ने जतायी असंतुष्टि
कुछ नेताओं ने केंद्रीय नेताओं के सामने पद दिये जाने को लेकर भी असंतुष्टि जाहिर की। इस पर केंद्रीय नेता ये समझा भी रहे हैं कि भाजपा में काम और समर्पण देखा जाता है, पद नहीं। आम पकने से पहले ईंट ना चलायें क्योंकि पेड़ लगेगा, आम होगा तो सब खायेंगे। अभी से ईंट चलाने पर कुछ नहीं मिलने वाला है। इधर, नये और पुराने का विवाद यहां भी सामने आया और कई नेताओं ने शिकायत की कि पद देने में पुराने नेताओं को दरकिनार किया गया। इसके अलावा राजनीतिक हिंसा से लेकर कुछ जगहों पर आपसी गुटबाजी की ​शिकायतें भी केंद्रीय नेताओं से की गयी।

 

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