सीट से जब उछले तो लगा कि अब नहीं बचेंगे : मुम्बई से कोलकाता पहुंचे यात्रियों ने कहा

एयर टर्बुलेंस ने 2 मिनट तक विमान के यात्रियों को झकझोरे रखा
कोलकाता : मुम्बई से कोलकाता पहुंची उड़ान संख्या यूके-775 के यात्रियों के लिए सोमवार का सफर जीवन भर याद रहने वाला बन गया। इन यात्रियों के मुताबिक यह यात्रा हमें इतना अधिक खौफ दे गया है कि कोई भी विमान में दूसरी बार बैठने से पहले 10 बार सोचेगा। इस उड़ान के यात्री बस बाल-बाल बचे हैं। यात्रियों ने बताया कि इतना अधिक टर्बुलेंस इन लोगों ने कभी नहीं झेला था। जब सीट से यात्री उछलने लगे तब लगा कि अब नहीं बच पाएंगे। टर्बुलेंस का वह 2 मिनट इतना आतंकित करने वाला था कि विमान की लैंडिंग के बाद भी कुछ यात्री बोल नहीं पा रहे थे। जब टर्बुलेंस था तब विमान में चींख और चिल्लाहट ही सुनाई दे रही थी। इस दौरान क्रू मेम्बरों द्वारा शांत रहने के लिए कहा जा रहा था लेकिन यह बहुत खतरनाक पलों में से एक था। इस बारे में एस दास ने बताया कि जब विमान उतरने वाला था, तब पायलट ने इस बारे में बताया। जब यह हवाओं के बीच फंसा तो हमें पहले लगा कि यह आम बात है लेकिन जब यह अधिक लड़खड़ाने लगा तब हमारे होश उड़ गये। एक ओर मैंने देखा कि लोग चिल्ला रहे हैं, तो कुछ बुजुर्ग महिलाएं प्रार्थना कर रही हैं। इस दौरान मुझे गले में चोट लग गयी। वहीं एटीसी अधिकारियों का कहना है कि टर्बुलेंस के दौरान फंसे विमान को देखने पर ऐसा लगा कि यह कोई खिलौने की तरह घूम रहा है। यात्रियों के मुताबिक कुछ या​त्रियों को इसका इतना अधिक बुरा प्रभाव पड़ा है कि वे अभी भी सदमें में हैं। विमान की लैंडिंग के तुरंत बाद घायल यात्रियों को एयरपोर्ट पर फर्स्ट एड दिया गया। इसके बाद 3 यात्रियों को अस्पताल भेजा गया। वहीं एयरलाइंस की टीम इसकी जांच कर रही है कि आखिर ऐसा कैसे हुआ। वहीं डीजीसीए भी इस पर नजर रखे हुए है। वहीं वरिष्ठ पायलटों का कहना है कि जो यात्री सीट बेल्ट नहीं पहने थे, उन्हें ही सबसे अधिक चोंटे आयी हैं। उड़ानों में बार – बार सीट बेल्ट लगाने के लिए कहने के बावजूद कुछ यात्री इसे नहीं लगाते हैं। मानसून के वक्त पायलटों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यह पहली बार है जब यात्री घायल हो गये।
मानसून में रूट को बदल देते हैं पायलट
मानसून में एयर टर्बुलेंस से बचने के लिए पायलट निर्धारित रास्ते में थोड़ा हेर-फेर करते हैं। इसकी जानकारी एटीसी से साझा कर ऐसा किया जाता है। कई बार निर्धारित रास्तों पर विमानों के गुजरते वक्त एयर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ता है। यह कुछ सेकेंड्स या एक मिनट तक का होता है। यात्री इसमें कम घायल होते हैं। एविएशन एक्सपर्ट के मुताबिक इस एयर टर्बुलेंस की क्या स्पीड थी, कैसे हुआ यह? एक जांच का विषय है।

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