छूट के बाद भी कोलकाता में नहीं चल रहीं निजी बसें, कोरोना नहीं ये है वजह

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में कोविड-19 नियमों में ढील मिलने और बसों के संचालन की अनुमति मिलने के बाद भी निजी बसों का संचालन नहीं शुरू हुआ है। इन बसों का संचालन शुरू ना होने की वजह कोरोना या सरकारी दिशा-निर्देश नहीं हैं बल्कि ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं। बस मालिकों ने बताया कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और सिर्फ 50 फीसदी बैठने की क्षमता के साथ बसें चलाना मुश्किल हो रहा है।
ऐसे ही एक बस मालिक और ड्राइवर दलबीर सिंह ने अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा कि बसों को चलाने के लिए हमें डीजल की जरुरत होती है। इसकी कीमत अब प्रति लीटर 93 रुपए के करीब है। हर बस को चलाने के लिए रोज 40-45 लीटर डीजल की जरुरत होती है। इसका मतलब है एक बस को चलाने की लागत तीन से चार हजार रुपए बैठती है।
कैसे होगी आय?
सिंह ने बताया कि कोरोना की वजह से सरकार का कहना है कि हम सिर्फ पचास फीसदी बैठने की क्षमता के साथ ही बसें चला सकते हैं। ऐसे में खर्चों का प्रबंधन और आय कैसे होगी? मालूम हो कि तेल विपणन कंपनियों ने लंबे ब्रेक के बाद गुरुवार को लगातार दूसरे दिन पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इस हिसाब से राष्ट्रीय राजधानी में गुरुवार को पेट्रोल की कीमत 98.81 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 89.18 रुपए प्रति लीटर बनी हुई है। देश भर में भी ईंधन की कीमतें अपरिवर्तित रहीं। ईंधन की कीमतों में आखिरी बार मंगलवार को संशोधन किया गया था। इसी तरह कोलकाता में पेट्रोल 98.64 और डीजल 92.03 प्रति लीटर है।
 

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