‘लक्ष्मी भंडार योजना’ में क्लब और पंचायत सदस्यों के प्रवेश पर लगी ‘नो एंट्री’

कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षी योजना ‘दुआर सरकार’ कैंप में ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ के फॉर्म लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन साथ ही फॉर्म भरने के नाम पर धोखाधड़ी और फॉर्म डिलीवरी में अनियमितता के लगातार आरोप लग रहे हैं। इसके मद्देनजर राज्य सचिवालय नबान्न ने कड़े फैसले का ऐलान किया है। बता दें कि इस योजना के तहत ममता बनर्जी की सरकार ने सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रति माह 500 रुपए और अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को 500 रुपए देने का ऐलान किया है। सोमवार को मुख्य सचिव हरिकृष्ण द्विवेदी ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि लक्ष्मी भंडार फार्म को भरने में पंचायत समिति या क्लब के सदस्यों को किसी भी तरह से शामिल नहीं किया जा सकता है। यदि आवश्यक हो तो आत्मनिर्भर समूहों या कॉलेज के छात्रों को नियुक्त करने की सलाह दी गई है।
“लक्ष्मी भंडार योजना” के फॉर्म भरने के नियम में किया गया बदलाव
ममता बनर्जी द्वारा महिलाओं को वित्तीय मदद देने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए फॉर्म भरने के नियमों में बदलाव किया गया है। पहले दुआरे सरकार योजना के तहत लक्ष्मी भंडार योजना का फॉर्म सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े क्लब उठा लेते थे और आरोप लगते थे कि इसे रुपये लेकर बेचा जा रहा है या गैर लाभावुकों को इसका लाभ दिया जा रहा है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए प्रत्येक फॉर्म पर यूनिक नंबर डाला गया लेकिन फिर भी इस पर रोक नहीं लगाई जा पा रही थी।

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