कोरोना के दर्दनाक दौर को अब भूलना चाहता है बंगाल

 अब वैक्सीन है तो उम्मीद है, लेकिन लापरवाही अभी भी नहीं – लोगों ने कहा
 राज्य में पहला कोविड का मामला 17 मार्च को, पहली मौत 23 मार्च को
 अब तक 10,000 से अधिक की मौत (इसमें को मॉ​डिरिटी भी शामिल)
कोलकाता : पिछले साल मार्च का महीना, जीवन अपनी रफ्तार से चल रही थी। अचानक कोरोना का आगमन हुआ और इसने वह मंजर दिखाया जिसे लोग ताउम्र भूल नहीं पायेंगे। बंगाल में कोरोना का पहला मामला 17 मार्च काे सामने आया था तथा पहली मौत 23 मार्च को हुई थी। उस दौरान वायरस अपने पूरे तेवर में था। डॉक्टरों और सरकार की हर कोशिश के बाद भी मामलों और मौत का ग्राफ बढ़ता गया। हाल ही में बंगाल में कोरोना से मौत के मामलों ने 10,000 के आंकड़े को पार किया है। हालांकि पहले की तुलना में मामलों में कमी जरूर आयी है। अभी तक 5,46,849 लोग स्वस्थ हुए तथा डिस्चार्ज रेट – 96.94% है। ऐसे में वैक्सीन के आने के बाद लोगों का भरोसा लौट रहा है। लोगों का कहना है कि फिर पिछले साल के मार्च के पहले की तरह जिंदगी का सफर तय करना चाहते हैं लेकिन जंग अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। सावधानी बरतनी जरूरी है।
बंगाल में कोरोना का फ्लेशबैक….
वे क्या साेचते हैं टीकाकरण पर जिन्होंने कोविड से अपनों को खोया।
दक्षिण हावड़ा के रहने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि अभी भी वह मंजर याद करके रूह कांप उठती है। कोरोना ने मेरे पिता को भी छीन लिया, मगर अब एक उम्मीद है कि टीकाकरण शुरू हुआ तो शायद जीवन से कोरोना का डर भी चला जाए।
कोरोना ने कहर राज्य में महीनों तक बरपाया
वैसे तो पूरी दुनिया व देशभर में काेरोना ने अपना कहर दिखाया मगर कोरोना महामारी ने बंगाल को बुरी तरह प्रभावित किया है। देश के सबसे घनी आबादी वाले राज्यों में शुमार बंगाल में सिर्फ तीन महीनों में तीन गुना ज्यादा मौतें हुई हैं। राज्य ने 26 नवंबर तक करीब 57 लाख लोगों का टेस्ट किया जिनमें से 4.7 लाख से ज्यादा केस कन्फर्म हुए।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिले
राज्य के सभी 23 जिले कोरोना वायरस के मामले से अछूता नहीं रहे, मगर कई ऐसे जिले हैं जहां पिछले कुछ महीनों पहले तक जिस तेजी से मामले और मौत के आंकड़े बढ़े, उसने निश्चित तौर पर राज्य सरकार की नींद उड़ा दी। इनमें कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना मुख्य रूप से शामिल रहे। मुख्य कारणों में से एक यह भी था कि यहां की जनसंख्या का घनत्व ज्यादा है।
मौत की वजह केवल कोरोना ही नहीं
वायरस ने ज्यादातर बुजुर्ग और पहले से बीमार लोगों को अपना​ शिकार बनाया। एक्सपर्ट कहते हैं कि ज्यादातर पीड़ितों में पहले से कोई न कोई बीमारी जैसे- हाइपरटेंशन या डायबिटीज पहले से मौजूद थी। राज्य सरकार के अनुसार बंगाल में कोरोना से हुई मौतों के 80 प्रतिशत से भी ज्यादा मामलों में कोई न कोई अन्य बीमारियां भी थीं।
कब-कब बढ़े और कब से घटने लगे मौत के मामले
* 25 मार्च तक राज्य के 23 जिलों में से 20 जिलों में कोरोना का एक भी केस दर्ज नहीं हुआ था। शुरुआती मई तक के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ 5 जिले छोड़कर हर जिलों में कोरोना के मामले थे और ये जिले थे अलीपुरदुआर, कूचबिहार, दक्षिण दिनाजपुर, पुरुलिया व बांकुड़ा।
* 4 अप्रैल को कोविड से मरने वालों की कुल संख्या 5 थी, मगर अप्रैल, मई, जून, जुलाई अगस्त से लेकर नवंबर व उसके बाद तक भी कोरोना तेजी से बढ़ा। 11 अगस्त के अांकड़े के अनुसार यह संख्या 2149 तक पहुंच गयी। समय के साथ मौत का आंकड़ा बढ़ता गया। एक – एक दिन में मरने वालों का आंकड़ा 50 को पार करता गया।
* 1 दिसंबर को भी मरने वालों के आंकड़े करीब 52 थे। 20 दिसंबर के बाद मौत के मामले पहले की तुलना में कम होते नजर आये, मगर राहत वाली नहीं।
दिसंबर मध्य के बाद मौत के आंकड़ों में गिरावट
आंकड़े मौत के
28 दिसबंर – 27
1 जनवरी – 26
5 जनवरी – 24
8 जनवरी – 21
12 जनवरी – 18
15 जनवरी – 16

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